धरमजयगढ़ में भारतमाला परियोजना के मुआवजे पर विवाद, नई कलेक्टर गाइडलाइन दर से भुगतान की मांग; किसानों ने सौंपा अभ्यावेदन
कुड़ेकेला। भारतमाला परियोजना-130A के तहत धरमजयगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर प्रशासन और प्रभावित भू-स्वामियों के बीच मुआवजा दर को लेकर मतभेद सामने आया है। प्रभावित किसानों ने आरोप लगाया है कि उनकी जमीन का मुआवजा पुरानी कलेक्टर गाइडलाइन दर के आधार पर तय किया जा रहा है, जबकि रायगढ़ जिले में 20 फरवरी 2026 से संशोधित कलेक्टर गाइडलाइन दरें लागू हो चुकी हैं।
परियोजना के तहत 114.410 से 121.450 किलोमीटर के बीच करीब 7.04 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। इसके लिए धरमजयगढ़ क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।
अधिसूचना की तारीख को लेकर किसानों का तर्क
प्रभावित भू-स्वामियों ने अनुविभागीय अधिकारी सह भू-अर्जन अधिकारी, धरमजयगढ़ के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत किया है। किसानों का कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 की धारा 3A के तहत केंद्र सरकार की अधिसूचना 17 फरवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित हुई थी, लेकिन स्थानीय समाचार पत्रों में इसका प्रकाशन 21 फरवरी 2026 को हुआ।
भू-स्वामियों का तर्क है कि जब समाचार पत्रों में प्रकाशन की तारीख 21 फरवरी है और इससे एक दिन पहले यानी 20 फरवरी से नई कलेक्टर गाइडलाइन दरें लागू हो चुकी थीं, तो मुआवजे की गणना नई दरों के आधार पर की जानी चाहिए।
8 सितंबर के नोटिस पर भी उठाए सवाल
किसानों ने प्रशासन की ओर से 8 सितंबर को जारी नोटिस को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि नोटिस में प्रत्येक भू-स्वामी की जमीन से संबंधित खसरा नंबर, अधिग्रहित होने वाला रकबा और मुआवजे की विस्तृत गणना स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है।
भू-स्वामियों ने बाजार मूल्य, प्रतिकर राशि, गुणन कारक और 100 प्रतिशत सोलेशियम की गणना का विस्तृत विवरण उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरी जानकारी और व्यक्तिगत सुनवाई के बिना एकतरफा कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
मुआवजा गणना को लेकर कानूनी प्रावधानों का हवाला
प्रभावित किसानों ने अपने अभ्यावेदन में RFCTLARR Act, 2013 की धारा 26 और 30 तथा प्रथम अनुसूची का हवाला देते हुए मुआवजा निर्धारण में लागू प्रावधानों के अनुसार 100 प्रतिशत सोलेशियम और ब्याज की मांग रखी है। किसानों ने अपने पक्ष के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और मार्च 2026 के मद्रास हाईकोर्ट के एक आदेश का भी उल्लेख किया है।
जमीन के मूल्यांकन पर भी आपत्ति
भू-स्वामियों का कहना है कि अधिग्रहण वाले क्षेत्र की जमीन धरमजयगढ़ की नगरीय सीमा, प्रस्तावित राष्ट्रीय राजमार्ग और औद्योगिक गतिविधियों वाले क्षेत्रों के नजदीक है। उनका दावा है कि ऐसी जमीन को केवल कृषि भूमि की दर से मूल्यांकित करने पर उन्हें आर्थिक नुकसान हो सकता है।
किसानों ने प्रशासन से अंतिम अवार्ड जारी करने से पहले मुआवजा दर की पुनर्समीक्षा, प्रत्येक खसरे का अलग-अलग विस्तृत गणना पत्रक उपलब्ध कराने और व्यक्तिगत सुनवाई की मांग की है। अब इस अभ्यावेदन पर प्रशासन की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर प्रभावित भू-स्वामियों की नजर है।

