पहली ही बारिश में बह गए विकास के दावे, पुलिया के अभाव में 20–25 परिवारों का जीवन संकट में; ग्रामीणों का सवाल– आखिर कब जागेगा सिस्टम?
फागूलाल रात्रे, लवन। चार दिनों की झमाझम बारिश के चलते नदी नाले उफान पर है जिसके चलते जनजीवन अस्त व्यस्त है तो वहीं दूसरी ओर सरकार के विकास के दावों की पोल खोल दी है। ग्राम पंचायत मल्लीन की वर्षों पुरानी समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। ध्रुव समाज भवन से ओमशंकर साहू के घर तक बहने वाले नाले पर आज तक पुलिया का निर्माण नहीं हो सका। नतीजा पहली ही तेज बारिश में नाला उफान पर आ गया और उसके उस पार बसे करीब 20–25 परिवारों का गांव से संपर्क प्रभावित हो गया। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से आवेदन गुहार और निरीक्षण का सिलसिला जारी है लेकिन जमीन पर विकास की एक ईंट भी नहीं रखी गई।
नाले के उस पार काशीराम साहू तिहारो साहू जनक साहू पुनाराम साहू गुमान साहू, हीरालाल साहू निर्मला साहू, ओमशंकर साहू,धरम सिंह ध्रुव, धरमू ध्रुव,धनसाय साहू,पहरु साहू,दादूराम साहू,सुशील कुमार साहू सहित अनेक परिवार रहते हैं। बरसात आते ही इन परिवारों की दिनचर्या बदल जाती है। खेत जाना हो, बाजार जाना हो, राशन लाना हो या किसी सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होना हो—हर काम उफनते नाले की मर्जी पर निर्भर हो जाता है।
सबसे ज्यादा मार उन करीब 20–25 स्कूली बच्चों पर पड़ती है, जिनकी पढ़ाई हर मानसून में प्रभावित होती है। तेज बहाव के कारण कई बार बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना पड़े या किसी बुजुर्ग को तत्काल उपचार की जरूरत हो, तो पूरा वार्ड चिंता में डूब जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी स्थिति में हर पल भारी पड़ता है।
हाल ही में ग्रामीण सुशील कुमार साहू के पिता के दशगात्र कार्यक्रम में भी गांव ने वही दर्दनाक दृश्य देखा, जो हर बरसात में यहां की नियति बन चुका है। कार्यक्रम में शामिल होने आए लोगों को उफनते नाले को जान जोखिम में डालकर पार करना पड़ा। महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं के बहते पानी के बीच आवागमन की तस्वीरें और वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही उपेक्षा का परिणाम है।
ग्रामीणों के अनुसार ध्रुव समाज भवन से ओम शंकर साहू के घर तक पुलिया निर्माण के लिए कई बार संबंधित विभागों और प्रशासन को आवेदन दिए जा चुके हैं। अधिकारी स्थल निरीक्षण भी कर चुके हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। अब ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर एक छोटी-सी पुलिया बनने में कितनी बरसातें और गुजरेंगी?
ग्रामीणों का व्यंग्य भी व्यवस्था पर गहरा सवाल खड़ा करता है। उनका कहना है कि “बरसात शुरू होते ही मल्लीन का यह वार्ड मानो ‘वीआईपी आइलैंड’ बन जाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यहां पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर नहीं, बल्कि उफनते नाले में अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती है। अगर आश्वासनों से पुलिया बनती, तो यहां अब तक कई पुल तैयार हो चुके होते।” ग्रामीणों का कहना है कि हर साल अधिकारी आते हैं, फोटो खिंचते हैं, निरीक्षण होता है, आश्वासन मिलता है और फिर अगली बरसात तक सब कुछ फाइलों में ही बहता रहता है।
वार्ड पंच उधो राम साहू ने कहा कि यह किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे वार्ड की सुरक्षा, बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों के सम्मान का सवाल है। उन्होंने शासन-प्रशासन से तत्काल पुलिया निर्माण शुरू कराने की मांग की।
इस बीच ग्राम पंचायत मल्लीन की सरपंच रामकली महेश मिर्झा, उपसरपंच हीरा बुंदा साहू तथा पंच जीराखन साहू ने भी शासन और प्रशासन से इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए ध्रुव समाज भवन से ओम शंकर साहू के घर तक पुलिया निर्माण की तत्काल स्वीकृति देने की मांग की है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही ग्रामीणों का आवागमन बाधित हो जाता है और स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों तथा मरीजों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक पुलिया का नहीं, बल्कि पूरे गांव की सुरक्षा और सम्मान का प्रश्न है।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गांवों में विकास, सुशासन और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे करती है, लेकिन मल्लीन का यह वार्ड आज भी एक पुलिया के लिए संघर्ष कर रहा है। उनका सवाल है कि जब समस्या वर्षों से प्रशासन के संज्ञान में है, कई बार निरीक्षण भी हो चुका है, तो समाधान अब तक क्यों नहीं हुआ?
बरसात अभी शुरू हुई है और पूरा मानसून बाकी है। ऐसे में ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि अब उन्हें नए सर्वे, नए वादे और नए आश्वासन नहीं चाहिए। उन्हें सिर्फ एक मजबूत पुलिया चाहिए, ताकि उनके बच्चे सुरक्षित स्कूल जा सकें, मरीज समय पर अस्पताल पहुंच सकें और हर बरसात में उनका वार्ड गांव से कटकर ‘वीआईपी आइलैंड’ बनने की मजबूरी से हमेशा के लिए मुक्त हो सके।



