पेंशनरों के लिए बड़ी राहत: छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश के बीच महंगाई राहत (DR) में सहमति की अनिवार्यता समाप्त
रायपुर: छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के लाखों पेंशनरों के लिए एक ऐतिहासिक और सुखद खबर सामने आई है। राज्य पुनर्गठन के लगभग 26 वर्षों बाद, दोनों राज्यों के बीच महंगाई राहत (Dearness Relief – DR) घोषित करने के लिए पारस्परिक सहमति की बाध्यता को अब समाप्त कर दिया गया है।
क्या है नया निर्णय?
मध्यप्रदेश शासन के वित्त विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, अब भविष्य में किसी भी राज्य को महंगाई राहत घोषित करने के लिए दूसरे राज्य की सहमति का इंतजार नहीं करना होगा। यह निर्णय 17 जुलाई को मध्यप्रदेश के वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी और छत्तीसगढ़ शासन के वित्त सचिव डॉ. रोहित यादव के संयुक्त हस्ताक्षर से जारी हुआ है। अब दोनों राज्य अपने स्तर पर स्वतंत्र रूप से पेंशनरों के लिए राहत आदेश जारी कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया सरल और त्वरित हो जाएगी।
पेंशनर्स महासंघ ने किया स्वागत
भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ, छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे पेंशनरों की एक बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि महासंघ द्वारा लगातार पत्राचार, ज्ञापनों और उच्च अधिकारियों के साथ की गई चर्चाओं के माध्यम से इस मुद्दे को उठाया गया था, जिसका यह सकारात्मक परिणाम है।
राज्य सरकार से अब क्या है मांग?
सहमति की बाधा दूर होने के बाद, भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने छत्तीसगढ़ सरकार से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है:
- DR भुगतान: केंद्र सरकार के समान 1 जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई राहत का आदेश बिना किसी देरी के जारी किया जाए।
- एरियर (बकाया): बढ़ी हुई महंगाई राहत का भुगतान बकाया एरियर सहित राज्य के सभी पेंशनरों और परिवार पेंशनरों को प्रदान किया जाए।
श्री नामदेव ने जोर देते हुए कहा कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए पेंशनरों को समय पर राहत मिलना उनका वैधानिक अधिकार है। शासन द्वारा जल्द लिए जाने वाले इस निर्णय से लाखों पेंशनभोगियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।



