प्रशासन ने सरकारी जमीन पर झोपड़ी बनाकर रह रहे लगभग 400 परिवारों को किया बेदखल, बच्चों की पढ़ाई हो रही प्रभावित
Bastar:
रहवासी अंधेरे में रहने को मजबूर
ऐसे में अपने घरों से बेदखल किए गए लगभग सैकड़ों रहवासी अंधेरे में सो रहे हैं और उनके बच्चे सड़क में लगे स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं. बेदखल किए गए इन परिवारों ने प्रशासन से गुहार लगाई थी कि उन्हें सरकारी योजना के तहत अटल आवास में घर दिया जाए या फिर कोई ऐसी जमीन में विस्थापित किया जाए जहां पर अपनी झोपड़ी बनाकर वे रह सकें. लेकिन अब तक प्रशासन ने इनकी कोई सुध नहीं ली है और ना ही इनके रहने के लिए घर दिला पाई है.
स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ रहे बच्चे
शहर के संजय गांधी वार्ड के वासियों का कहना है कि पिछले कई सालों से वे इस वार्ड में रह रहे हैं और इसके लिए बकायदा निगम को नल बिल और घर का टैक्स भी कटा रहे हैं. लेकिन कुछ सप्ताह पहले रेल विभाग ने उनके घरों को खाली करने का फरमान जारी किया है. अचानक प्रशासन द्वारा लिए गए इस निर्णय से उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है. उन्होंने इसके लिए जिला प्रशासन और रेल प्रशासन से समय भी मांगा है लेकिन बिना समय दिए रेल विभाग के कर्मचारियों ने बेजा कब्जाधारी लगभग 400 परिवारों के बिजली कनेक्शन और नल कनेक्शन काट दिए. ऐसे में वे सड़क पर आने को मजबूर हो गए. वहीं उन्होंने कहा कि 400 परिवारों के लगभग 100 से अधिक बच्चे स्कूल और कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं और अब उनकी वार्षिक परीक्षाएं भी शुरू हो चुकी है. बच्चों का भी कहना है कि उन्हें परीक्षा में पास होना है और कोरोना काल की वजह से उनकी पढ़ाई भी प्रभावित हुई है. ऐसे में अब ऐन वक्त पर उनके घरों के बिजली कनेक्शन काट देने से उन्हें पढ़ाई में दिक्कत हो रही है.
वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी
इधर हाल ही में बस्तर कलेक्टर ने शहर के इन दोनों वार्डो का दौरा किया था और यहां बेजा कब्जा किये लोगों से मुलाकात भी की थी. उनके विस्थापन के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाने की बात कही थी. वहीं रेल विभाग द्वारा इन बेजा कब्जाधारियों के बिजली कनेक्शन काट दिया जाने से बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने जल्द ही उनसे बात कर वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की बात कही है. कलेक्टर ने कहा कि इन 400 परिवारों के विस्थापन के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है. दूसरी जगह सरकारी जमीन का सर्वे का भी कार्य किया जा रहा है. जल्द ही इनके विस्थापन के लिए कोई पहल किया जाएगा. वहीं बच्चों की शिक्षा प्रभावित ना हो इसके लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी



