बिलासपुर: इमलीपारा की संकरी गलियों में ‘बारूद के ढेर’ पर ज़िंदगियाँ, प्रशासनिक लापरवाही से पनप रहा बड़े हादसे का खतरा
बिलासपुर (विशेष रिपोर्ट):
शहर के इमलीपारा स्थित रिहायशी इलाके में नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही व्यावसायिक गतिविधियों से स्थानीय रहवासियों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। घनी आबादी और संकरी गलियों के बीच पिछले लगभग 10 वर्षों से संचालित एक थोक जूता दुकान स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द और अनहोनी के डर का सबब बन चुकी है।
रिहायशी इलाके में ज्वलनशील सामग्री का अंबार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस घनी बस्ती के आसपास कई आवासीय मकान और छात्र-छात्राओं के हॉस्टल स्थित हैं। इसी बीच दुकान में भारी मात्रा में जूते-चप्पल और पैकेजिंग सामग्री जैसे अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थों का अनियंत्रित भंडारण किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी भी दिन यहाँ कोई बड़ा अग्निकांड हो सकता है, जिसकी चपेट में आकर कई मासूम ज़िंदगियाँ और संपत्तियाँ तबाह हो सकती हैं।
आपातकालीन सेवाओं का पहुँचना असंभव, बड़े हादसे का अंदेशा
इमलीपारा की यह गली इतनी संकरी है कि किसी भी आपात स्थिति या आगजनी की घटना के समय दमकल (फायर ब्रिगेड) की गाड़ियाँ और अन्य राहत सेवाएँ समय पर घटना स्थल तक पहुँच ही नहीं सकतीं। इसके बावजूद यहाँ बिना किसी वैध प्रशासनिक अनुमति के इस प्रकार की थोक दुकानें धड़ल्ले से फल-फूल रही हैं। यहाँ रहने वाले विद्यार्थियों और परिवारों की जान-माल हर पल जोखिम में है।
नगर निगम और जिला प्रशासन पर खड़े हुए गंभीर सवाल
सबसे शर्मनाक बात यह है कि इस पूरी स्थिति के बावजूद नगर निगम और जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों ने आज तक मौके का जायजा लेना तक मुनासिब नहीं समझा।
- आखिर किसकी शह पर इतने सालों से आवासीय क्षेत्र में अवैध रूप से व्यावसायिक गतिविधियाँ और खतरनाक भंडारण चल रहा है?
- क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़े हादसे और जन-धन की भारी हानि का इंतजार कर रहे हैं?
स्थानीय रहवासियों की सीधी मांग: ‘हादसे से पहले जागे प्रशासन’
स्थानीय निवासियों, छात्रों और नागरिकों ने प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी व्यक्त करते हुए मांग की है कि: - तत्काल निरीक्षण: स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और अग्निशमन (फायर) विभाग की टीम तुरंत स्थल का निरीक्षण करे।
- नियमों की जांच: दुकान के व्यावसायिक उपयोग, फायर सेफ्टी (अग्नि सुरक्षा) व्यवस्था और भंडारण क्षमता की कड़ी जांच की जाए।
- कठोर कार्रवाई: नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बिना किसी दबाव के दुकान पर तत्काल नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
नतीजा:
प्रशासनिक अनदेखी और आंखें मूंदने की यह आदत किसी दिन बड़े विनाश का कारण बन सकती है। यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ सकता है..?
