बिलासपुर में जिला पंचायत CEO के खिलाफ बसपा का प्रदर्शन, FIR और निष्पक्ष जांच की मांग

बिलासपुर। जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल के खिलाफ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने मोर्चा खोलते हुए प्रदर्शन किया। बसपा ने पंचायत सचिव के साथ कथित जातिगत दुर्व्यवहार के मामले में कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए CEO के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

सोमवार को बसपा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर चौक से रैली निकाली। रैली कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां कार्यकर्ताओं ने जिला पंचायत CEO के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट का घेराव किया। इसके बाद राज्यपाल के नाम अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई।

अप्रैल में सामने आया था मामला

मामला 24 अप्रैल का बताया जा रहा है। सकरी स्थित वन चेतना केंद्र में अधिकारी-कर्मचारियों की बैठक आयोजित की गई थी। आरोप है कि बैठक के दौरान जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल ने ग्राम पंचायत नगोई के सचिव तुलसी ध्रुव से उनका सरनेम पूछा और इसके बाद उन्हें बैठक से बाहर जाने के लिए कहा।

तुलसी ध्रुव ने इस मामले की शिकायत कलेक्टर सहित वरिष्ठ अधिकारियों से की। इसके अलावा उन्होंने अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई।

शिकायत के बाद निलंबन का आरोप

बसपा नेताओं का आरोप है कि शिकायत के बाद पंचायत सचिव के खिलाफ ग्राम पंचायत नगोई के कार्यों की जांच के लिए आठ सदस्यीय टीम गठित की गई। उनका दावा है कि यह जांच दुर्भावना के चलते कराई गई।

इसके बाद 13 जुलाई को तुलसी ध्रुव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उन्होंने 27 जुलाई को इसका जवाब दिया, लेकिन 3 अगस्त को उन्हें निलंबित कर दिया गया। बसपा ने आरोप लगाया कि शिकायत करने के बाद से पंचायत सचिव को लगातार परेशान किया जा रहा है।

पार्टी ने पंचायत कार्यवाही निरीक्षण नियम और पंचायत राज अधिनियम का हवाला देते हुए जांच की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए हैं।

सात दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन की चेतावनी

बसपा ने पूरे मामले को कथित जातिगत प्रताड़ना बताते हुए CEO संदीप अग्रवाल के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर, निलंबन और बर्खास्तगी की मांग की है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

CEO ने आरोपों को बताया निराधार

वहीं, जिला पंचायत CEO संदीप अग्रवाल ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मामले की शिकायत पहले ही अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में की जा चुकी है और वहां जांच भी हो चुकी है।

CEO के अनुसार, बैठक में दुर्व्यवहार किए जाने का आरोप सही नहीं है। बैठक में अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि मामले की जांच पुलिस अधीक्षक से भी कराई गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित कर्मचारी के निलंबन के बाद वह अलग-अलग स्थानों पर शिकायतें लेकर जा रहा है।

फिलहाल, मामले को लेकर बसपा की ओर से कार्रवाई की मांग और जिला पंचायत CEO की ओर से आरोपों को खारिज किए जाने के बाद दोनों पक्षों के दावों के बीच विवाद बना हुआ है।

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