बिलासपुर : RTE पर हाईकोर्ट सख्त, हर स्कूल का मांगा पूरा डेटा; सरकार को 3 हफ्ते में हलफनामा देने का निर्देश

नए चीफ जस्टिस कृष्ण राम महापात्र की अध्यक्षता वाली बेंच ने पहली ही सुनवाई में मांगी विस्तृत जानकारी

बिलासपुर, 9 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार कानून यानी RTE Act, 2009 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी तलब की है। मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।

हर स्कूल में RTE की कितनी सीटें, कितने दाखिले?

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ऐसा विस्तृत चार्ट पेश करने को कहा है, जिसमें छत्तीसगढ़ के हर स्कूल में RTE के तहत आरक्षित सीटों की संख्या स्पष्ट हो।

सरकार को यह भी बताना होगा कि प्रत्येक स्कूल में इन सीटों के मुकाबले कितने बच्चों को प्रवेश दिया गया है और कितनी सीटें अभी खाली हैं।

इस जानकारी के जरिए कोर्ट यह देखना चाहता है कि RTE के तहत आरक्षित सीटों पर प्रवेश की स्थिति पूरे राज्य में क्या है।

सरकार से पूछा- RTE लागू करने के लिए कौन सी SOP?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि RTE अधिनियम की धारा 12(1)(c) को लागू करने के लिए फिलहाल कौन सी SOP (Standard Operating Procedure) अपनाई जा रही है।

राज्य सरकार को हलफनामे में इस प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी देनी होगी।

तीन सप्ताह में देना होगा रिकॉर्ड

डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया है कि राज्य सरकार की ओर से किसी सक्षम अधिकारी को निर्धारित अवधि के भीतर हलफनामा और संबंधित चार्ट पेश करना होगा।

सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान 5 अक्टूबर को अगली तारीख रखने का अनुरोध किया गया। इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से कम से कम सात दिन पहले हलफनामा दाखिल किया जाए और उसकी एक प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को भी उपलब्ध कराई जाए।

13 जनहित याचिकाओं से जुड़ा मामला

RTE के तहत बच्चों के प्रवेश और कानून के क्रियान्वयन से जुड़े मुद्दों को लेकर सीवी भगवंत राव, विकास तिवारी सहित 13 अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं।

इन याचिकाओं में राज्य में RTE के प्रावधानों को प्रभावी तरीके से लागू कराने की मांग उठाई गई है। मामले की सुनवाई लंबे समय से हाईकोर्ट में चल रही है।

नई बेंच के सामने पहली सुनवाई में मिला अहम निर्देश

मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालने के बाद जस्टिस कृष्ण राम महापात्र ने डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई की। उनके साथ न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल भी बेंच में शामिल रहे।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केवल सामान्य जवाब के बजाय स्कूलवार सीट, प्रवेश और रिक्त सीटों का वास्तविक आंकड़ा मांगा है। इससे अब राज्य सरकार को RTE के जमीनी क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड अदालत के सामने रखना होगा।

5 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

अब राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामे और स्कूलवार आंकड़ों पर अगली सुनवाई में हाईकोर्ट की नजर रहेगी। इसके बाद कोर्ट यह देखेगा कि RTE के तहत आरक्षित सीटों पर प्रवेश की व्यवस्था किस तरह संचालित हो रही है और कानून के प्रावधानों को लागू करने के लिए सरकार की मौजूदा प्रक्रिया कितनी प्रभावी है।

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