बीज निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, श्रम सम्मान निधि बहाल करने की मांग

रायगढ़, 9 मई 2026: छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं। कर्मचारियों ने श्रम सम्मान निधि बंद किए जाने और रोजगार सुरक्षा नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है।

कर्मचारियों का कहना है कि दिसंबर 2025 से श्रम सम्मान निधि बंद होने के बाद वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।


“परिवार चलाने का सहारा थी श्रम सम्मान निधि”

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी संघ के अनुसार कर्मचारियों को श्रम सम्मान निधि के रूप में हर महीने मिलने वाली 4000 रुपये की राशि परिवार के पालन-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण सहारा थी।

संघ का आरोप है कि इस राशि पर रोक लगाकर कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी में डाल दिया गया है।


आउटसोर्स भर्ती पर भी उठाए सवाल

कर्मचारी संघ ने आरोप लगाया कि एक तरफ पुराने कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी की जा रही है, वहीं दूसरी ओर आउटसोर्सिंग के जरिए नए कर्मचारियों की भर्ती की तैयारी की जा रही है।

संघ ने सवाल उठाया कि जब आउटसोर्स कर्मचारियों को 15 से 17 हजार रुपये प्रतिमाह देने के लिए बजट उपलब्ध है, तो वर्षों से सेवा दे रहे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को उचित वेतन और श्रम सम्मान निधि देने में समस्या क्यों हो रही है।


फर्जी रिपोर्ट पेश करने का आरोप

संघ ने यह भी आरोप लगाया कि हड़ताल के प्रभाव को कम दिखाने और शासन को गुमराह करने के लिए बीज भंडारण से संबंधित फर्जी रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

कर्मचारियों का दावा है कि प्रदेश की अधिकांश समितियों में बीज भंडारण का कार्य प्रभावित है, लेकिन कागजों में स्थिति सामान्य दिखाई जा रही है।


दो प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन जारी

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में श्रम सम्मान निधि को दोबारा शुरू करना और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को रोजगार सुरक्षा एवं उचित वेतनमान देना शामिल है।

कर्मचारियों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


निष्पक्ष जांच की मांग

संघ ने शासन से बीज निगम की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने और गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की है।

कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि कर्मचारियों और उनके परिवारों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी से राहत मिल सके।

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