भारत की 6G दौड़ में बड़ी एंट्री, अमेरिका समेत 25 देशों के साथ मिलकर तय करेगा अगली पीढ़ी की तकनीक की दिशा

सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी और भरोसेमंद AI पर होगा सहयोग

नई दिल्ली, 8 सितंबर 2026। भारत ने अगली पीढ़ी की मोबाइल तकनीक यानी 6G नेटवर्क के विकास और वैश्विक दिशा तय करने वाली एक अंतरराष्ट्रीय पहल में शामिल होकर अपनी स्थिति मजबूत की है। भारत अब अमेरिका समेत 24 अन्य देशों के साथ इस पहल का हिस्सा बन गया है। इसके साथ इस समूह में शामिल सरकारों की कुल संख्या 26 हो गई है।

अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने भारत के इस पहल से जुड़ने की घोषणा की। यह पहल 6G नेटवर्क के विकास में सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, विश्वसनीयता और नवाचार जैसे मुद्दों पर देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।

6G को लेकर वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की तैयारी

इस पहल के तहत भाग लेने वाले देश आने वाले समय में 6G से संबंधित नीतियों और तकनीकी प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करेंगे। इसमें नेटवर्क सुरक्षा, इंटरऑपरेबिलिटी, नेटवर्क की मजबूती और भरोसेमंद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषय शामिल हैं।

इसका उद्देश्य ऐसी अगली पीढ़ी की संचार व्यवस्था विकसित करने में सहयोग करना है, जो अलग-अलग देशों और नेटवर्क के बीच बेहतर तरीके से काम कर सके और सुरक्षा मानकों पर भी खरी उतरे।

G20 बैठक के दौरान हुआ अहम घटनाक्रम

भारत के इस समूह में शामिल होने की घोषणा G20 Innovation Ministerial के दौरान हुई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक के साथ बैठक की थी। इसके बाद अमेरिकी वाणिज्य विभाग की ओर से भारत के शामिल होने की जानकारी दी गई।

भारत पहले से चला रहा है Bharat 6G Mission

भारत के लिए 6G की तैयारी कोई नई पहल नहीं है। देश पहले से Bharat 6G Alliance के माध्यम से इस क्षेत्र में रिसर्च, मानकीकरण और तकनीकी विकास पर काम कर रहा है।

सरकार के अनुसार जुलाई 2026 तक Bharat 6G Alliance में 90 सदस्य शामिल हो चुके थे। इसमें टेलीकॉम कंपनियों, उपकरण निर्माताओं, स्टार्टअप, शोध संस्थानों और शिक्षण संस्थानों की भागीदारी है।

भारत 6G के वैश्विक मानकों को विकसित करने वाली संस्थाओं में भी सक्रिय भागीदारी कर रहा है। सरकार का लक्ष्य भारत को 2030 तक 6G तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचाना है।

6G में भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षा

भारत ने 6G को लेकर अपनी घरेलू रिसर्च और मानकीकरण क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार के मुताबिक भारत वैश्विक 6G पेटेंट में करीब 10 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। साथ ही 6G से जुड़ी रिसर्च और टेस्टिंग के लिए देश में टेराहर्ट्ज टेस्टबेड जैसी परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है भारत का यह कदम?

6G अभी व्यावसायिक रूप से आम लोगों के इस्तेमाल में नहीं आया है, लेकिन दुनिया के प्रमुख देश इसकी तकनीकी नींव, मानक और सुरक्षा ढांचे को लेकर अभी से काम कर रहे हैं।

ऐसे में इस अंतरराष्ट्रीय पहल में भारत की भागीदारी से देश को 6G के वैश्विक मानकों, सुरक्षा व्यवस्था और भविष्य के नेटवर्क आर्किटेक्चर से जुड़ी चर्चाओं में अपनी तकनीकी प्राथमिकताएं रखने का अवसर मिलेगा।

भारत के लिए यह कदम केवल तेज इंटरनेट की तैयारी नहीं, बल्कि भविष्य की डिजिटल और संचार तकनीक में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Back to top button