रायगढ़: ऐतिहासिक टाउन हॉल के संरक्षण के साथ नगर निगम के भविष्य के कार्यालय की वैकल्पिक व्यवस्था पर हो त्वरित मंथन— संजय देवांगन

रायगढ़: रायगढ़ के ऐतिहासिक टाउन हॉल के संरक्षण और नगर निगम कार्यालय के भविष्य को लेकर पूर्व पार्षद एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी संचार विभाग के प्रवक्ता संजय देवांगन ने एक महत्वपूर्ण विचार रखते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित करना जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक नगर निगम के प्रशासनिक कार्यों और जनता की सुविधाओं के लिए एक स्थायी व सुव्यवस्थित भवन का रोडमैप तैयार करना है।

ऐतिहासिक महत्व और टाउन हॉल का इतिहास

रायगढ़ का टाउन हॉल केवल एक ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि शहर के गौरवशाली इतिहास का एक जीवंत प्रतीक है। उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार:

  • इस ऐतिहासिक भवन का भूमिपूजन 20 जून 1929 को हुआ था।
  • इसका लोकार्पण 24 जनवरी 1931 को संपन्न हुआ था।
  • इतिहास में इस भवन का गौरवशाली अध्याय यह भी है कि 3 जुलाई 1945 से 31 दिसंबर 1947 तक यहां उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) भी संचालित हो चुका है।
    ऐसे ऐतिहासिक और बहुमूल्य भवन को पुरातत्व विभाग को सौंपकर उसकी मूल पहचान और विरासत को संरक्षित करने का निर्णय शहर के लिए बेहद सराहनीय कदम है।

नगर निगम के समक्ष व भविष्य के कार्यालय को लेकर बड़ा सवाल

वर्तमान में इसी ऐतिहासिक टाउन हॉल परिसर से नगर निगम रायगढ़ का संचालन हो रहा है। ऐसे में यह सवाल प्रासंगिक है कि जब यह भवन पूरी तरह पुरातत्व विभाग को सौंप दिया जाएगा, तब निगम का कार्यालय कहां संचालित होगा?
संजय देवांगन ने रेखांकित किया कि नगर निगम कोई सामान्य कार्यालय नहीं है, बल्कि यह शहर के लाखों नागरिकों से प्रतिदिन सीधे जुड़ा हुआ स्थानीय शासन का मुख्य केंद्र है। यहाँ महापौर, पार्षद, अधिकारी-कर्मचारी बैठते हैं तथा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, कर भुगतान, भवन अनुज्ञा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और जल आपूर्ति जैसी तमाम जनसेवाओं के लिए रोज सैकड़ों आम नागरिक पहुंचते हैं।

दूरदर्शी और स्थायी समाधान की आवश्यकता

केवल टाउन हॉल खाली करने के अंतिम समय का इंतजार करना प्रशासनिक दृष्टि से उचित नहीं होगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि दूरदर्शिता के साथ एक स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए:

  1. वैकल्पिक एवं स्थायी स्थल का चयन: नगर निगम के लिए आज से ही उपयुक्त और स्थायी भूमि की तलाश शुरू की जाए।
  2. नागरिकों की सुगम पहुंच: नया परिसर ऐसा हो जो शहर के नागरिकों के लिए आसानी से सुलभ (Accessible) हो।
  3. भविष्य की जरूरतें: बढ़ते शहरीकरण और कामकाज के विस्तार को ध्यान में रखते हुए विशाल कार्यालय भवन, आधुनिक पार्किंग, जनसुविधा केंद्र, और बड़े सभाकक्ष के निर्माण की पर्याप्त गुंजाइश हो।

तत्काल बैठक और संयुक्त प्रयास का आग्रह

प्रवक्ता संजय देवांगन ने जिला प्रशासन, नगर निगम प्रशासन और क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया है कि वे इस विषय पर जल्द से जल्द उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करें। वैकल्पिक स्थल के चयन की प्रक्रिया अभी से आरंभ की जानी चाहिए, ताकि टाउन हॉल के पूर्ण हस्तांतरण के वक्त कार्यालय संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या असमंजस की स्थिति उत्पन्न न हो।
“विरासत भी बचे और शहर का भविष्य भी सुरक्षित रहे—इसी सकारात्मक और दूरदर्शी सोच के साथ आज से ही ठोस योजना बनाना समय की सबसे बड़ी मांग है।”

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