मुंडा में अंतिम संस्कार की व्यवस्था बदहाल,बारिश में खेतों की मेढ से शव ले जाने की मजबूरी 

बलौदाबाजार,
फागूलाल रात्रे, लवन।
किसी अपने को खोने का दुख कम नहीं होता लेकिन जब अंतिम विदाई देने के लिए भी रास्तों की तकलीफो से जूझना पड़े तो परिजनों की पीड़ा और बढ़ जाती है। जिला मुख्यालय से महज 14 किलोमीटर दूर मेन रोड पर स्थित आदर्श गांव मुंडा में कुछ ऐसे ही हालात हैं। अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था भी बदहाली का शिकार है। यहां बारिश की दिनों में अंतिम संस्कार के लिए शव को मुक्तिधाम तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। रास्ते में कीचड़ और पानी भरने के कारण ग्रामीणों को खेतों की मेढ से होकर शव यात्रा निकालनी पड़ती है। करीब 12 वर्ष पहले टेढ़ही तालाब के पास बनाया गया मुक्तिधाम अब पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बरसात के दिनों में यहां अंतिम संस्कार करना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। मुक्तिधाम पहुंचने का रास्ता कीचड़ और पानी से भर जाने के कारण लोगों को खेतों की मेढ से होकर शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में परिजनों के साथ ग्रामीणों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान खेतों में पानी भर जाने और रास्ते की बदहाल स्थिति के कारण शव यात्रा निकालना तक मुश्किल हो जाता है। अंतिम विदाई के समय जब परिवार पहले से ही दुख और पीड़ा में होता है तब रास्ते की परेशानी उनकी तकलीफ को और बढ़ा देते हैं। कई बार खेतों की मेढ के सहारे जोखिम उठाकर अंतिम संस्कार स्थल तक पहुंचना पड़ता है। मुंडा गांव कुल 15 वार्डो में बसा हुआ है। इसमें वार्ड क्रमांक 1 से 9 तक के लोग सड़क पार क्षेत्र में निवास करते हैं जबकि वार्ड क्रमांक 10 से 15 तक के लोग बस्ती पारा में रहते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पार क्षेत्र में मुक्तिधाम के लिए पहले से ही स्थान आरक्षित है इसके बावजूद यहां अंतिम संस्कार के लिए समुचित शेड और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था नहीं हो पाई है। धोबी समाज के मीडिया प्रभारी युवा समाजसेवी कमलेश रजक पूर्व सरपंच डॉ कृतराम वर्मा  उपसरपंच प्रतिनिधि मनीराम वर्मा पंच परमानंद साहू पीतांबर रजक धनेश्वर वर्मा पंच प्रतिनिधि महेंद्र वर्मा एवं हरिशंकर वर्मा परमेश्वर साहू भागवत वर्मा तेजा वर्मा बृजभूषण वर्मा सुमेर वर्मा नेहरू वर्मा नंदराम वर्मा देवा वर्मा सहित ग्रामीणों ने कहा कि सड़क पार क्षेत्र में आरक्षित जमीन पर मुक्तिधाम शेड निर्माण बहुत जरूरी हैं। बरसात के दिनों में शव को खेतों की मेढ से होकर ले जाना पड़ता है यह स्थिति बेहद कष्टदायक है। अंतिम संस्कार जैसी बुनियादी जरूरत के लिए भी ऐसी परेशानी का सामना करना उचित नहीं है। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों का कहना है कि यदि सड़क पार क्षेत्र में मुक्तिधाम शेड निर्माण की सुविधाएं विकसित कर दी जाए तो बारिश के मौसम में भी अंतिम संस्कार आसानी से किया जा सकेगा। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने अंतिम संस्कार करने में हो रही परेशानी को लेकर शासन प्रशासन से मुक्तिधाम शेड निर्माण बनाने की मांग की है ताकि मौसम की मार के बीच लोगों को अपनों की अंतिम विदाई में परेशानी न होना पड़े।
इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच सुश्री शशिकला पांडेय ने कहा कि आरक्षित जमीन पर मुक्तिधाम शेड निर्माण के लिए पंचायत प्रस्ताव बनाकर जनपद पंचायत को भेज दी गई हैं। स्वीकृत मिलने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ की जाएगी।
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