राजस्थान की महिला विधायक के साथ राहुल गांधी की तस्वीर हुई वायरल
Bharat Jodo Yatra: कांग्रेस (Congress) की भारत जोड़ो यात्रा (Bharat Jodo Yatra) इस समय राजस्थान (Rajasthan) से होकर गुजर रही है. इस दौरान जोधपुर (Jodhpur) के ओसियां (Osian Assembly) से कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा (Divya Maderna) भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं. राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) से इनकी नजदीकियों और भारत जोड़ो यात्रा के दौरान ली गई फोटो को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. 25 सितम्बर के बाद से दिव्या मुखर होकर बागियों पर हमला बोल रही हैं. राजस्थान में तीन पीढ़ियों से मदेरणा परिवार का राजनीति में दबदबा रहा है.
सोशल मीडिया पर विधायक दिव्या मदेरणा बहुत एक्टिव रहती हैं. आए दिन वह यहां संदेश, अपने कार्यक्रम के साथ कई जानकारियां साझा करती हैं. राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा के 8वें दिन यानि 13 दिसम्बर को दिव्या मदेरणा ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से लिखा- “निकले हैं लेके इरादा, तो मंज़िल पर ही रुकेंगे, देश जोड़ने की ये ज़िद है, इसे पूरा कर के ही रहेंगे.” राजनीतिक विश्लेषक उनके इस संदेश के कई मायने निकाल रहे हैं.
वहीं दिव्या मदेरणा ने प्रियंका गांधी के साथ अपनी फोटो शेयर करते हए लिखा- “चल के साथ में हम फिर से भारत को एक बनाएंगे, नफ़रत की यहां जगह नहीं, संदेश देश में फैलाएंगे.” गांधी परिवार से बढ़ती नजदीकी और प्रदेश में बढ़ते उनके राजनीतिक कद को लेकर कयास आराईयों का दौर शुरु हो गया है.
बागियों पर बोला तीखा हमला
वैसे तो दिव्या हमेशा मुखर होकर बोलती रहीं हैं. फिर भी 25 सितम्बर के घटनाक्रम के बाद से ज्यादा चर्चा में हैं. शान्तिधारीवाल, महेश जोशी, धर्मेंद्र राठौड़ बागी रवैये को लेकर विरोध करने वालों में सबसे आगे थीं, दिव्या ने पार्टी आलाकमान से बागियों पर सख्त कार्रवाई की भी मांग किया था. दिव्या पहली बार विधायक बनी हैं, लेकिन कांग्रेस के दूसरे नेताओें की तुलना वह पार्टियों की नीतियों को लेकर अधिक एक्टिव रहीं हैं.
परिवार से मिली है राजनीतिक विरासत
राजस्थान की राजनीति में मदेरणा परिवार का सालों से दबदबा रहा है. परसराम मदेरणा को किसान मसीहा और राजस्थान की राजनीति के लौह पुरूष के रुप में एक विशेष पहचान रही है. वो 1952 में पहली बार सरपंच बने. इसके बाद 1957 में ओसियां से विधायक और मंत्री बन गए. परसराम मदेरणा 1985 में पहली बार चुनाव हार गए, लेकिन चार साल बाद 1989 में भोपालगढ़ से विधायक बने. उसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बनाये गए और प्रदेश की राजनीति में अपनी ने धाक बनाई. वहीं दिव्या मदेरणा पारिवारिक राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में पूरे जोश के साथ सरगर्म हैं.




