मोहन भागवत बोले- स्वयंसेवकों से बड़ा है संघ, राष्ट्रहित सर्वोपरि; बिलासपुर में 2311 नई शाखाएं खुलने की जानकारी
बिलासपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयंसेवकों के बिना संघ अधूरा है, लेकिन संघ अपने स्वयंसेवकों से बड़ा है। उन्होंने संघ की तुलना समुद्र से करते हुए कहा कि जिस तरह समुद्र की पहचान उसकी बूंदों से होती है, उसी तरह स्वयंसेवक संघ की पहचान बनाते हैं। संघ का उद्देश्य राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज को संगठित करना है।
डॉ. मोहन भागवत गुरुवार को बिलासपुर के कोनी स्थित सरस्वती ग्राम शिक्षा परिषद संस्थान में आयोजित बौद्धिक वर्ग को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वयंसेवकों से सामाजिक सद्भाव बनाए रखने, संगठन के कार्यों का विस्तार करने और राष्ट्रहित में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में 540 से अधिक स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
हिंदू समाज के साथ पूरे राष्ट्र के हित में काम करता है संघ
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि कुछ लोग मानते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ केवल हिंदुओं के कल्याण के लिए काम करता है, जबकि संघ का उद्देश्य पूरे राष्ट्र का हित है। उन्होंने कहा कि संगठन का काम किसी के प्रति घृणा फैलाना नहीं, बल्कि सात्विक प्रेम और सद्भाव के आधार पर हिंदू समाज तथा राष्ट्र को एकजुट करना है।
उन्होंने स्वयंसेवकों को समझाया कि संगठन की मजबूती उसके सदस्यों की सक्रियता, अनुशासन और सामाजिक जुड़ाव पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक स्वयंसेवक को अपने व्यवहार और कार्यों के माध्यम से समाज में सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
पहले उपेक्षा हुई, फिर विरोध और अब हो रही जय-जयकार
डॉ. भागवत ने संघ की स्थापना के बाद के दौर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1925 में संगठन की स्थापना के बाद शुरुआती समय में इसकी उपेक्षा हुई, फिर विरोध का सामना करना पड़ा और अब संघ की प्रशंसा भी की जा रही है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में स्वयंसेवकों को अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ काम करने की आवश्यकता है। शताब्दी वर्ष के दौरान शुरू किए गए सामाजिक संपर्क और संगठन विस्तार के कार्यों को आगे भी जारी रखने पर उन्होंने जोर दिया।
भागवत ने स्वयंसेवकों को एक व्यक्ति को परिचित बनाने, उससे मित्रता स्थापित करने और फिर उसे संघ के कार्यों से जोड़ने का लक्ष्य भी बताया।
पानी के उदाहरण से समझाया संघ और स्वयंसेवकों का संबंध
संघ प्रमुख ने स्वयंसेवकों और संगठन के आपसी संबंध को समझाने के लिए पानी का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु से पानी बनता है। इसी तरह स्वयंसेवक मिलकर संघ का निर्माण करते हैं।
उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक संगठन की ताकत हैं, लेकिन संघ की पहचान और उद्देश्य व्यक्तिगत सदस्यों से व्यापक हैं। इस दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों से डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों को समझने की अपील की।
आंदोलन का उद्देश्य समाधान होना चाहिए, नफरत फैलाना नहीं
मोहन भागवत ने लोकतंत्र में विरोध और आंदोलनों की भूमिका पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आंदोलनों का उद्देश्य केवल राजनीतिक हित साधना या समाज में नफरत फैलाना नहीं होना चाहिए। विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने का प्रयास किया जाना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी गतिविधियां संवैधानिक और कानूनी सीमाओं के भीतर रहकर की जानी चाहिए। स्वयंसेवकों को अपने आचरण के प्रति सजग रहने की जरूरत है, ताकि किसी व्यक्ति की गलती से पूरे संगठन की छवि प्रभावित न हो।
शताब्दी वर्ष में शाखाओं का विस्तार करने पर जोर
संघ प्रमुख ने कहा कि शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित कार्यक्रमों को आगे भी जारी रखना होगा। समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क बढ़ाने और शाखाओं का विस्तार करने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने संघ के तीन प्रमुख आधारों के रूप में शाखा, कुटुंब और अपनत्व का उल्लेख किया। साथ ही कहा कि संघ से जुड़े आनुषांगिक संगठन स्वतंत्र और स्वावलंबी हैं। आवश्यकता पड़ने पर संघ उन्हें वैचारिक मार्गदर्शन देता है।
एक साल में 2311 नई शाखाएं शुरू होने की जानकारी
बौद्धिक वर्ग से पहले संघ पदाधिकारियों की बैठक आयोजित की गई, जिसमें शताब्दी वर्ष के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा की गई। इस दौरान दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले एक वर्ष में 2311 नई शाखाएं शुरू हुई हैं और अब शाखाओं की कुल संख्या बढ़कर 5500 हो गई है।
बैठक में अलग-अलग क्षेत्रों में शाखाओं के विस्तार के प्रयोगों का भी उल्लेख किया गया। रायपुर में रात के समय काम करने वाले पावभाजी विक्रेताओं को जोड़ने के लिए रात्रि शाखा शुरू करने की जानकारी दी गई। वहीं, मस्तूरी मंडल की एक शाखा के 10 स्वयंसेवकों ने 10 अलग-अलग स्थानों पर नई शाखाएं शुरू करने की बात बताई।
बिलासपुर में आज दो सत्रों में होंगी बैठकें
शुक्रवार, 23 अक्टूबर को संघ की दो सत्रों में बैठकें निर्धारित हैं। पहले सत्र में आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा, युवा वर्ग को संगठन से जोड़ने और शताब्दी वर्ष के कार्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के खिलाफ बनाए जा रहे कथित नैरेटिव को लेकर भी रणनीति पर विचार किया जाएगा। दूसरे सत्र में संघ पदाधिकारियों के साथ भाजपा के संगठनात्मक पदाधिकारी, नेता और मंत्री शामिल हो सकते हैं।
कार्यक्रम स्थल पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
मोहन भागवत के बिलासपुर आगमन को देखते हुए रेलवे स्टेशन से कोनी स्थित कार्यक्रम स्थल तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम स्थल और आसपास 100 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मधुलिका सिंह, डीएसपी स्तर के अधिकारी और कई निरीक्षक शामिल रहे। बौद्धिक वर्ग में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध था। कार्यक्रम में शामिल होने वाले पदाधिकारियों और सदस्यों को प्रवेशिका जारी की गई थी तथा प्रवेश से पहले उनके मोबाइल फोन जमा कराए गए थे।
बिलासपुर में आयोजित इस बौद्धिक वर्ग में मोहन भागवत ने संगठन विस्तार, सामाजिक सद्भाव, स्वयंसेवकों के आचरण और राष्ट्रहित को लेकर अपना संदेश दिया। वहीं, आगामी बैठकों में संघ के कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों की आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी।
