राज्य अतिथि शिक्षकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, लंबित मांगों पर सरकार से जल्द निर्णय की मांग
दुर्ग में शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र से आंदोलन की शुरुआत, संविलियन, समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग
दुर्ग। राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेशभर के हजारों राज्य अतिथि शिक्षकों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी। शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र दुर्ग में अतिथि शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से वर्षों से लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
10 वर्षों से निभा रहे शैक्षणिक जिम्मेदारी
संघ का कहना है कि राज्य अतिथि शिक्षक पिछले करीब 10 वर्षों से शासकीय विद्यालयों में नियमित व्याख्याताओं के समान शिक्षण कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल 20 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है, वह भी वर्ष में सिर्फ 10 माह के लिए। संघ का आरोप है कि समान कार्य करने के बावजूद उन्हें नियमित शिक्षकों जैसी सुविधाएं और वेतन नहीं मिल रहा।
सेवा सुरक्षा और सुविधाओं का अभाव
संघ के अनुसार, अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय नहीं मिलता, नियमित अवकाश का लाभ नहीं दिया जाता और मातृत्व अवकाश संबंधी प्रावधानों का भी समुचित पालन नहीं होता। हर नए शैक्षणिक सत्र में सेवा जारी रहने को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे हजारों परिवार प्रभावित होते हैं।
मोदी की गारंटी लागू करने की मांग
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि विधानसभा और विभागीय स्तर पर कई बार उनकी मांगें उठाई गईं। उनका दावा है कि ‘मोदी की गारंटी’ में राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) के संविलियन/समायोजन का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी
संघ ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि सम्मानजनक जीवन, सेवा सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों की मांग को लेकर किया जा रहा है। यदि सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
संघ की प्रमुख मांगें
- राज्य अतिथि शिक्षक (विद्यामितान) का संविलियन/समायोजन।
- समान कार्य के लिए समान वेतन लागू किया जाए।
- सेवा सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
- ग्रीष्मकालीन अवकाश का पूर्ण मानदेय दिया जाए।
- मातृत्व, पितृत्व एवं अन्य वैधानिक अवकाश का लाभ मिले।
- 10 वर्षों की सेवा को मान्यता देते हुए स्थायी एवं न्यायसंगत सेवा नीति बनाई जाए।
संघ ने प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से अपने आंदोलन का समर्थन करने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने वाले शिक्षकों के साथ न्याय करना सरकार की नैतिक और संवैधानिक जिम्मेदारी है।


