
आस्था के आगे प्रकृति भी नतमस्तक: बेहरामर में आंधी-तूफान के बीच भी गूंजती रही ‘जय कन्हैया लाल’ की जयकार
बेहरामर में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान अचानक बदला मौसम, तेज आंधी-तूफान ने मचाई अफरा-तफरी
कुड़ेकेला। ग्राम बेहरामर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन अचानक मौसम का मिजाज बदल गया और तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश ने कथा स्थल को प्रभावित कर दिया। इस दौरान पंडाल क्षतिग्रस्त हो गया और कुछ समय के लिए आयोजन में व्यवधान उत्पन्न हुआ।

भक्तों का अद्भुत जज्बा, टूटा पंडाल फिर कुछ ही घंटों में खड़ा किया गया
तेज बारिश और हवाओं के बावजूद ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ। बारिश थमते ही श्रद्धालुओं और ग्रामवासियों ने मिलकर क्षतिग्रस्त पंडाल को दोबारा खड़ा किया और व्यवस्था को फिर से सुचारू कर दिया। ग्रामीणों के इस सामूहिक प्रयास ने आस्था और एकजुटता की मिसाल पेश की।

महाराज रमाकांत जी की कथा से भक्तिभाव में डूबा पूरा गांव
कथा के चौथे दिन व्यासपीठ से महाराज रमाकांत जी ने वामन अवतार, रामावतार और श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का भावपूर्ण वर्णन किया। जैसे ही श्रीकृष्ण जन्म का प्रसंग आया, पूरा वातावरण “नंद घर आनंद भयो” और “जय कन्हैया लाल की” के जयकारों से गूंज उठा।
आंधी-तूफान भी फीका, आस्था के सामने प्रकृति भी शांत नजर आई
प्राकृतिक आपदा के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था और भक्ति अडिग रही। लोगों ने भावविभोर होकर नृत्य किया और भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं का आनंद लिया। यह दृश्य पूरी तरह भक्तिमय और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर रहा।
आसपास के गांवों से भी पहुंच रहे श्रद्धालु, बढ़ रहा आयोजन का प्रभाव
बेहरामर में चल रही भागवत कथा अब क्षेत्रीय आस्था का केंद्र बन गई है। आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर कथा का श्रवण कर रहे हैं, जिससे आयोजन और अधिक भव्य और दिव्य होता जा रहा है।


