रायगढ़: कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में हुई जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति की बैठक; पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के प्रभावितों के हितों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश

रायगढ़, 7 अगस्त 2026: कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में एसईसीएल (SECL) की पेलमा ओपन कास्ट परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन को व्यवस्थित, पारदर्शी और नियमानुसार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति की बैठक कलेक्टोरेट के सृजन सभाकक्ष में संपन्न हुई। बैठक में परियोजना के लिए भूमि अर्जन से प्रभावित ग्रामों के परिवारों के पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन, रोजगार और अन्य सभी पुनर्वास लाभों पर विस्तार से चर्चा की गई।

09 प्रभावित ग्रामों के विषयों की समीक्षा

बैठक में पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के तहत भूमि अर्जित किए गए कुल 09 ग्रामों—पेलमा, उरबा, लालपुर, मड़वाडूमर, सकता, मिलूपारा, खर्रा, हिन्झर एवं जरहिडीह—के परियोजना प्रभावित परिवारों से जुड़े विषयों की गहन समीक्षा की गई। इस दौरान अपर कलेक्टर श्री रवि राही, एसडीएम श्री प्रवीण तिवारी, एसईसीएल के अधिकारी, समिति के सदस्यगण तथा संबंधित ग्राम पंचायतों के ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

कलेक्टर द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश एवं बिंदु:

  • अिनियमों व नीतियों के अनुरूप पुनर्वास: कलेक्टर ने निर्देशित किया कि सभी प्रभावित परिवारों का पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन शासन की नीतियों और लागू अधिनियमों के अनुरूप हो, तथा उनके हितों का विशेष ध्यान रखते हुए सभी पात्र लाभ दिए जाएं।
  • शासकीय भूमि का चिन्हांकन व ग्रामीणों की सहमति: पुनर्व्यवस्थापन के लिए उपयुक्त शासकीय भूमियों का चिन्हांकन करने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि स्थल चयन में संबंधित ग्रामवासियों की राय और परामर्श को प्राथमिकता दी जाए ताकि स्थान पूरी तरह सुविधाजनक और स्वीकार्य हो।
  • रोजगार के लिए ‘डिसेंडिंग ऑर्डर’ और ‘क्लबिंग कॉन्सेप्ट’ का परीक्षण: कोल इंडिया लिमिटेड की नीति के तहत रोजगार देने के लिए अपनाए जाने वाले ‘डिसेंडिंग ऑर्डर कॉन्सेप्ट’ एवं ‘क्लबिंग कॉन्सेप्ट’ का तुलनात्मक परीक्षण करने के निर्देश दिए गए, ताकि यह तय हो सके कि प्रभावितों के हित में कौन-सी व्यवस्था अधिक लाभप्रद है।
  • कम सर्किल रेट वाले ग्रामों के लिए अतिरिक्त लाभ: ग्राम हिन्झर एवं जरहिडीह की भूमि का सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम होने के कारण, प्रभावित ग्रामवासियों के हितों की भरपाई के लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त पुनर्वास लाभ प्रदान करने की पहल करने पर विशेष जोर दिया गया।
    कलेक्टर ने अंत में यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि पुनर्वास की प्रक्रिया केवल भूमि अर्जन तक सीमित न रहे, बल्कि प्रभावित परिवारों के सामाजिक और आर्थिक हितों का भी पूरा संरक्षण किया जाए।
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