रायगढ़ : केलो जलापूर्ति के नाम पर निगम को करोड़ों की पेनाल्टी, संजय देवांगन ने उठाए सवाल; जांच की मांग

रायगढ़। केलो नदी से शहर में पेयजल आपूर्ति के लिए जल संसाधन विभाग को भुगतान किए जा रहे वाटर टैक्स और पेनाल्टी को लेकर नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस नेता संजय देवांगन ने आरोप लगाया है कि नगर निगम और जल संसाधन विभाग के बीच स्थायी अनुबंध नहीं होने के कारण निगम को सामान्य दर से करीब तीन गुना अधिक भुगतान करना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में निगम पर 7 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो चुका है, जिसमें लगभग 4.70 करोड़ रुपये पेनाल्टी के हैं।

संजय देवांगन ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। इस संबंध में उन्होंने नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन भी सौंपा है।

तीन वर्षों में 7 करोड़ से अधिक बकाया होने का दावा

संजय देवांगन के अनुसार, केलो परियोजना से शहर के 48 वार्डों में पेयजल आपूर्ति के लिए नगर निगम प्रतिवर्ष करीब 11 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी ले रहा है। उनका आरोप है कि जल संसाधन विभाग और नगर निगम के बीच स्थायी अनुबंध नहीं होने के कारण निगम को अधिक दर से वाटर टैक्स चुकाना पड़ रहा है।

उन्होंने बताया कि उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में वाटर टैक्स का बकाया करीब 7 करोड़ 5 लाख रुपये तक पहुंच गया है। इसमें लगभग 4.70 करोड़ रुपये केवल पेनाल्टी के रूप में शामिल हैं।

हर महीने 13 लाख रुपये अतिरिक्त नुकसान का आरोप

देवांगन ने दावा किया कि मौजूदा व्यवस्था के कारण नगर निगम को हर महीने करीब 13 लाख रुपये और प्रतिदिन लगभग 43 हजार रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इस राशि का उपयोग शहर में नई पाइपलाइन बिछाने और नागरिक सुविधाओं के विस्तार में किया जा सकता था।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई वार्डों में अमृत मिशन की पाइपलाइन का विस्तार अब तक पूरा नहीं हुआ है। कुछ पार्षद अपने क्षेत्रों में पाइपलाइन विस्तार और घरों तक पानी नहीं पहुंचने की शिकायत नगर निगम को लिखित रूप में दे चुके हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

स्थायी अनुबंध नहीं होने पर उठाए सवाल

कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि नगर निगम पिछले पांच वर्षों से अस्थायी अनुबंध के आधार पर जलापूर्ति व्यवस्था क्यों चला रहा है? उन्होंने कहा कि यदि समय रहते शासन से अनुमति लेकर स्थायी अनुबंध की प्रक्रिया पूरी की जाती, तो निगम पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ कम हो सकता था।

उन्होंने इंटेकवेल और स्टॉप डैम के काम में देरी को भी इस स्थिति से जोड़ते हुए सवाल किया कि बजट की कमी के कारण ये कार्य क्यों अटके रहे और क्या इसी वजह से जल संसाधन विभाग ने स्थायी अनुबंध करने से इनकार किया?

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

संजय देवांगन ने नगर निगम के तकनीकी और प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता के टैक्स से जमा राशि पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय भार के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के वेतन से नुकसान की वसूली करने की मांग भी रखी है।

देवांगन ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो कांग्रेस आम जनता के साथ मिलकर आंदोलन करेगी।

Back to top button