रायगढ़ : दिवाली बाजार में सजे स्व-सहायता समूहों के स्टॉल, महिलाओं के हुनर को मिला कारोबार का मंच
रायगढ़। दिवाली की रौनक के बीच सावित्रीनगर टाउनशिप में तीन दिवसीय दिवाली बाजार की शुरुआत हुई है। यहां तमनार क्षेत्र की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अपने हाथों से तैयार किए गए स्थानीय उत्पादों की बिक्री कर रही हैं। इस पहल से महिलाओं को रोजगार और आमदनी का अवसर मिलने के साथ कॉलोनी के रहवासियों को भी त्योहार की खरीदारी के लिए एक ही स्थान पर विभिन्न सामग्री उपलब्ध हो रही है।
जिंदल पावर के अधिकारियों ने किया बाजार का शुभारंभ
बुधवार शाम आयोजित कार्यक्रम में जिंदल पावर के कार्यपालक निदेशक गजेंद्र रावत, माइंस के सीईओ एवं प्रेसिडेंट प्रकाश, श्रीमती प्रियंका प्रकाश और समूह के सीएसआर प्रमुख ऋषिकेश शर्मा ने फीता काटकर तथा दीप प्रज्वलित कर बाजार का उद्घाटन किया।
अतिथियों ने बाजार में लगाए गए सभी स्टॉलों का भ्रमण किया और महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की जानकारी ली। कार्यपालक निदेशक गजेंद्र रावत ने समूह की महिलाओं के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन उन्हें आर्थिक रूप से आगे बढ़ने का अवसर देते हैं। उन्होंने महिलाओं को उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता बेहतर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
माइंस के सीईओ प्रकाश ने परिवार के साथ बाजार का भ्रमण किया और विभिन्न स्टॉलों से खरीदारी भी की। इस अवसर पर सीएसआर के एजीएम राजेश रावत, प्रबंधक शीतल पटेल सहित संयंत्र के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
मिट्टी के सामान से लेकर मिलेट्स के उत्पादों तक उपलब्ध
दिवाली बाजार में स्थानीय महिलाओं की रचनात्मकता और पारंपरिक हुनर की झलक देखने को मिल रही है। यहां आकृति समूह द्वारा तैयार किए गए सिलाई के कपड़े, मिट्टी से बने टेराकोटा उत्पाद और हर्बल सामग्री बिक्री के लिए रखी गई हैं।
इसके अलावा क्षेत्र में उत्पादित मोटे अनाज से तैयार रागी, ज्वार और बाजरे के खाद्य उत्पाद भी बाजार का हिस्सा हैं। बच्चों द्वारा बनाए गए सजावटी सामान के स्टॉल भी लगाए गए हैं। गांव के पारंपरिक व्यंजनों से लेकर आधुनिक उपयोग की सामग्री तक, यहां ग्राहकों के लिए कई तरह के विकल्प उपलब्ध हैं।
तीन दिन तक मिलेगी खरीदारी की सुविधा
सावित्रीनगर टाउनशिप में आयोजित यह बाजार तीन दिनों तक चलेगा। आयोजन का उद्देश्य स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सीधा बाजार उपलब्ध कराना और स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना है।
इस तरह के आयोजनों से महिलाओं को अपने उत्पादों की पहचान बनाने, ग्राहकों से सीधे जुड़ने और पारिवारिक आमदनी बढ़ाने का अवसर मिलता है। साथ ही स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक कारीगरी को भी प्रोत्साहन मिलता है।





