रायगढ़: पुनर्वास भूमि की बिक्री और पांच दिन में नामांतरण पर सवाल, शिकायत के बाद जांच शुरू

कुड़ेकेला। धरमजयगढ़ कॉलोनी निवासी सुशांत पाल ने ग्राम बायसी कॉलोनी स्थित पुश्तैनी एवं पुनर्वास भूमि की कथित नियम-विरुद्ध बिक्री, तत्काल नामांतरण और बाद में किए गए डायवर्सन को लेकर प्रशासन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने के साथ नामांतरण और डायवर्सन आदेश को निरस्त करने की मांग की है। शिकायत के बाद राजस्व विभाग ने मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

परिवार की सहमति और अनुमति के बिना जमीन बेचने का आरोप

शिकायत में सुशांत पाल ने बताया है कि ग्राम बायसी कॉलोनी स्थित खसरा नंबर 96/1, रकबा 0.931 हेक्टेयर भूमि उनके पिता सुभाष पाल के नाम दर्ज थी। शिकायतकर्ता के अनुसार यह जमीन परिवार की पुश्तैनी भूमि होने के साथ पुनर्वास योजना के तहत प्राप्त हुई थी।

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 13 जुलाई 2023 को सुभाष पाल ने परिवार के अन्य सदस्यों की सहमति के बिना उक्त भूमि धरमजयगढ़ कॉलोनी निवासी दीपक कुमार विश्वास के पक्ष में विक्रय कर दी।

शिकायतकर्ता का दावा है कि पुनर्वास भूमि के हस्तांतरण के लिए आवश्यक सक्षम प्राधिकारी की अनुमति भी नहीं ली गई थी। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

रजिस्ट्री के महज पांच दिन बाद नामांतरण पर सवाल

मामले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी शिकायतकर्ता ने सवाल उठाए हैं। आवेदन के मुताबिक, भूमि की रजिस्ट्री के बाद महज पांच दिनों के भीतर 18 जुलाई 2023 को नामांतरण की कार्रवाई पूरी कर दी गई।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नामांतरण से पहले नियमानुसार आवश्यक जांच, दस्तावेजों का परीक्षण और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।

आवेदन में तत्कालीन तहसीलदार भोज कुमार डहरिया के कार्यकाल में नामांतरण किए जाने का उल्लेख करते हुए इसकी प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।

डायवर्सन आदेश को लेकर भी उठे सवाल

शिकायत के अनुसार, नामांतरण के कुछ समय बाद इसी भूमि के व्यपवर्तन यानी डायवर्सन की कार्रवाई भी की गई। आवेदन में बताया गया है कि 12 अक्टूबर 2023 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व न्यायालय, धरमजयगढ़ द्वारा मुर्गा फार्म सह गोदाम निर्माण जैसी व्यावसायिक गतिविधि के लिए डायवर्सन आदेश जारी किया गया।

शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि भूमि पुनर्वास योजना के तहत प्राप्त थी और उसके हस्तांतरण पर नियामकीय प्रतिबंध लागू थे, तो पहले बिक्री और नामांतरण की वैधता की जांच आवश्यक थी।

पटवारी से मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट

मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए राजस्व विभाग की ओर से हल्का पटवारी से विस्तृत प्रतिवेदन मांगे जाने की जानकारी सामने आई है। अब भूमि के रिकॉर्ड, रजिस्ट्री, नामांतरण प्रक्रिया, पुनर्वास भूमि से संबंधित शर्तों और डायवर्सन आदेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

नामांतरण और डायवर्सन निरस्त करने की मांग

शिकायतकर्ता सुशांत पाल ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित नामांतरण एवं डायवर्सन कार्रवाई को निरस्त किया जाए।

फिलहाल मामला शिकायत और जांच के स्तर पर है। भूमि की बिक्री, नामांतरण और डायवर्सन की वैधानिकता पर अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच और उपलब्ध राजस्व दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

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