रायगढ़ : पोरडा–चिमटापानी कोल परियोजना के सर्वे पर रोक की मांग, प्रभावित ग्रामीणों ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
मांगें पूरी होने तक सर्वे नहीं कराने की अपील, मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास पर स्पष्ट नीति की उठाई मांग
रायगढ़। घरघोड़ा विकासखंड अंतर्गत प्रस्तावित पोरडा–चिमटापानी कोल परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष आवाज बुलंद की है। युवा कांग्रेस ग्रामीण जिला अध्यक्ष एवं पूर्व नगर पंचायत उपाध्यक्ष उस्मान बेग के नेतृत्व में विभिन्न गांवों के ग्रामीणों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घरघोड़ा और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जब तक प्रभावित परिवारों की मांगों पर स्पष्ट और लिखित निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक भूमि सर्वेक्षण और परियोजना से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया शुरू न की जाए।
कई गांवों की भूमि अधिग्रहण का प्रस्ताव
प्रस्तावित परियोजना के तहत पोरडा, कठरापाली, कांटाझरिया, सिंघनपुर, कोनपारा और चिमटापानी सहित कई गांवों की कृषि भूमि अधिग्रहित किए जाने का प्रस्ताव है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे हजारों परिवारों के सामने आजीविका, पुनर्वास, रोजगार, पर्यावरण और सामाजिक अस्तित्व से जुड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
पारदर्शिता और स्पष्ट जानकारी की मांग
ग्रामीणों ने ज्ञापन में कहा कि वर्ष 2025 में केवल पोरडा गांव में सर्वेक्षण किया गया था, लेकिन अब तक परियोजना की स्थिति, प्रभावित परिवारों की सूची, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास संबंधी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। ऐसे में अन्य गांवों में सर्वे शुरू करना उचित नहीं होगा।
ज्ञापन में रखी गई प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने भूमि स्वामियों को बंटांकन एवं राजस्व अभिलेख दुरुस्त कराने का अवसर देने, बाजार मूल्य के अनुसार कम से कम चार गुना मुआवजा निर्धारित करने, मकान, पेड़, कुआं, बोरवेल, फसल सहित सभी परिसंपत्तियों का अलग से मूल्यांकन कर पूर्ण मुआवजा देने तथा भुगतान समयबद्ध तरीके से करने की मांग की है।
इसके अलावा प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को स्थायी रोजगार, ठेका एवं आउटसोर्सिंग कार्यों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता, सभी विस्थापित परिवारों के लिए मूलभूत सुविधाओं सहित समुचित पुनर्वास तथा वन अधिकार अधिनियम के लंबित मामलों का निराकरण किए बिना भूमि अधिग्रहण नहीं करने की मांग भी रखी गई है।
ग्रामसभा की सहमति के बाद ही आगे बढ़े प्रक्रिया
ग्रामीणों ने मांग की है कि परियोजना से जुड़ी सभी शर्तों को ग्रामसभा की उपस्थिति में लिखित समझौते (एमओयू) का हिस्सा बनाया जाए तथा ग्रामसभा की पूर्व सहमति के बिना सर्वेक्षण, भूमि अधिग्रहण या परियोजना संबंधी कार्य शुरू न किया जाए।
प्रशासन और एसईसीएल से सकारात्मक पहल की उम्मीद
ज्ञापन सौंपने के दौरान उस्मान बेग ने कहा कि ग्रामीण विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्पष्ट नीति बनाने की मांग की।
ज्ञापन की प्रतिलिपि कलेक्टर रायगढ़, एसईसीएल प्रबंधन, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार और अन्य संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है। फिलहाल प्रभावित ग्रामीणों की मांगों पर प्रशासन और एसईसीएल के रुख पर क्षेत्रवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं।



