रायगढ़ : भाजपा पार्षदों के मीना बाजार पास लौटाने की चर्चा, वजह को लेकर सियासी हलकों में अटकलें
रायगढ़। शहर में चल रहे मीना बाजार को लेकर नगर निगम की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार नगर निगम के कई भाजपा पार्षदों ने उन्हें उपलब्ध कराए गए मीना बाजार के पास वापस लौटा दिए हैं। हालांकि पास लौटाने के पीछे वास्तविक वजह क्या है, इसे लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है।
कर्मचारियों के जरिए वापस भेजे गए पास
बताया जा रहा है कि नगर निगम की ओर से भाजपा पार्षदों को मीना बाजार के पास उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से कई पार्षदों ने कथित तौर पर पास अपने पास रखने के बजाय उन्हें देने पहुंचे कर्मचारी को दोबारा बुलाकर वापस कर दिया।
सूत्रों के अनुसार कुछ पार्षदों ने इस संबंध में रायगढ़ विधायक एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी को भी जानकारी दी है।
बुधवार को कुछ और पार्षदों के पास लौटाने की चर्चा
बताया जा रहा है कि जिन पार्षदों ने अब तक पास वापस नहीं किए हैं, उनमें से कुछ के बुधवार को नगर निगम पहुंचकर पास जमा करने की संभावना है। हालांकि कितने पार्षदों ने पास लौटाए हैं और कितने अभी ऐसा करने वाले हैं, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
नाराजगी की वजह को लेकर अलग-अलग चर्चाएं
पास वापस करने के पीछे पार्षदों की नाराजगी की चर्चा जरूर है, लेकिन इसकी स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है। सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि नगर निगम से जुड़े कुछ भाजपा नेताओं की कार्यशैली और मीना बाजार से संबंधित व्यवस्थाओं को लेकर कुछ पार्षद असंतुष्ट हैं।
हालांकि इन दावों की संबंधित पार्षदों या भाजपा संगठन की ओर से फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
मीना बाजार को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
रायगढ़ के मीना बाजार को लेकर इससे पहले भी व्यवस्थाओं और आम लोगों से लिए जाने वाले प्रवेश शुल्क को लेकर सवाल उठ चुके हैं। अगस्त में कांग्रेस नेताओं ने गेट एंट्री शुल्क समाप्त करने की मांग को लेकर महापौर को ज्ञापन भी सौंपा था।
वहीं सितंबर में मीना बाजार के स्टॉल और टैक्स से जुड़े आरोपों को लेकर भी एक स्थानीय रिपोर्ट सामने आई थी।
अभी साफ नहीं कि मामला राजनीतिक रूप लेगा या नहीं
भाजपा पार्षदों द्वारा पास लौटाने की खबर यदि सही साबित होती है, तो इसे नगर निगम के भीतर चल रही नाराजगी के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। हालांकि फिलहाल इसे लेकर किसी बड़े राजनीतिक टकराव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि बुधवार को कितने पार्षद पास वापस करते हैं और क्या इस मामले पर संबंधित पार्षद, नगर निगम नेतृत्व या भाजपा संगठन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है।












