रायगढ़: मांड-कुरकुट नदी में फिर अवैध रेत खनन के आरोप, कार्रवाई के बावजूद नहीं थम रहा खेल

कुड़ेकेला/छाल। रायगढ़ जिले के छाल क्षेत्र में मांड और कुरकुट नदी से कथित अवैध रेत उत्खनन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप है कि नदी क्षेत्रों में लगातार रेत निकासी की जा रही है और बरभौना समेत आसपास के इलाकों में रेत से लदे ट्रैक्टरों की आवाजाही जारी है।

हालांकि, यह भी तथ्य है कि प्रशासन पहले इन क्षेत्रों में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। ऐसे में सवाल यह है कि कार्रवाई के बाद भी यदि अवैध उत्खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं तो इसकी निगरानी और रोकथाम का स्थायी तंत्र कितना प्रभावी है।

बरभौना में पहले 10 ट्रैक्टर और लोडर हो चुके हैं जब्त

1 अगस्त 2026 को बरभौना में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायत पर खनिज एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने 10 ट्रैक्टर और एक ट्रैक्टर-लोडर जब्त किया था। प्रशासन ने उस समय अवैध खनिज गतिविधियों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रखने की बात कही थी।

इससे पहले जून 2026 में कुरकुट नदी से अवैध रूप से रेत निकाले जाने के मामले में वन विभाग ने 12 रेत से लदे ट्रैक्टर जब्त किए थे। रिपोर्ट के मुताबिक तस्करी के लिए जंगल के भीतर से रास्ता बनाए जाने की बात भी सामने आई थी।

मांड नदी में भी सामने आ चुका है अवैध खनन का मामला

मई 2026 में मांड नदी क्षेत्र में अवैध रेत खनन के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी सामने आई थी। चंद्रशेखरपुर क्षेत्र में अवैध रेत निकासी के दौरान एक चेन माउंटेन मशीन और वाहनों को जब्त किए जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।

वहीं जुलाई में कुड़ेकेला-बंगरसूता पुल के पास मांड नदी में रेत निकालने के दौरान एक ट्रैक्टर के नदी में फंसने का मामला भी सामने आया था। उस समय नदी का जलस्तर बढ़ने के बावजूद रेत निकासी किए जाने को लेकर सवाल उठे थे।

कार्रवाई के बाद भी उठ रहे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदी क्षेत्रों में लगातार निगरानी हो और अवैध उत्खनन में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर नियमित कार्रवाई की जाए तो इस गतिविधि पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन स्थानों पर पहले कार्रवाई हो चुकी है, वहां दोबारा अवैध उत्खनन की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं। क्या कार्रवाई केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित रह जाती है या अवैध खनन के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क की भी पहचान की जा रही है?

साठगांठ के आरोपों की जांच जरूरी

स्थानीय स्तर पर कुछ लोग खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित मिलीभगत और अवैध वसूली जैसे आरोप भी लगा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और बिना जांच के इन्हें तथ्य के रूप में नहीं कहा जा सकता।

ऐसे में यदि प्रशासन के पास इन आरोपों से संबंधित शिकायतें पहुंचती हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अवैध रेत उत्खनन किस स्तर पर हो रहा है, इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं और पहले की गई कार्रवाई के बावजूद गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो रही हैं।

प्रशासन से निगरानी और ठोस कार्रवाई की मांग

नदी से अवैध रेत निकासी का असर केवल राजस्व पर नहीं पड़ता, बल्कि नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए स्थानीय लोगों ने मांड और कुरकुट नदी के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित निरीक्षण, अवैध रास्तों को बंद करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

अब देखना होगा कि हाल में सामने आई शिकायतों पर जिला प्रशासन और खनिज विभाग मैदानी जांच कर क्या कार्रवाई करता है। विभाग का पक्ष सामने आने पर उसे भी इस खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

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