रायगढ़ में कॉलोनाइजरों की मनमानी पर जिला प्रशासन का बड़ा एक्शन: 2015 से 2026 तक की स्वीकृत कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस भूमि की होगी जांच
रायगढ़ जिले में कॉलोनियों के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित भूमि के प्रावधानों और नियमों की अनदेखी करने वाले कॉलोनाइजरों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर वर्ष 2015 से 2026 के बीच स्वीकृत कॉलोनियों की व्यापक जांच के आदेश दिए गए हैं। इस जांच के तहत ईडब्ल्यूएस भूमि के आरक्षण, नामांतरण, मौके की वास्तविक स्थिति और भूखंडों के विक्रय व उपयोग के तमाम रिकॉर्ड्स को खंगाला जाएगा।
इन प्रमुख क्षेत्रों तक फैला है जांच का दायरा
प्रशासन द्वारा शुरू की गई इस जांच का दायरा रायगढ़ शहर के साथ-साथ आसपास के कई प्रमुख इलाकों तक फैला हुआ है। इसमें मुख्य रूप से बोईरदादर, बड़े रामपुर, अतरमुड़ा (छोटे व बड़े), छातामुड़ा, मिठ्ठूमुड़ा, विजयपुर, सांगीतराई, बेलादुला, दरोगामुड़ा, कोसमनारा, घरघोड़ा, कसैया, तमनार, लामीदरहा, सहसपुर, जगतपुर, बेन्द्राचुंआ, सुकुलभठली, पंडरीपानी, अमलीभौना, छींच और कौहाकुंडा जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
15 दिनों के भीतर मांगी गई विस्तृत रिपोर्ट
कलेक्टर द्वारा जारी पत्र के मुताबिक रायगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), आयुक्त नगर पालिक निगम रायगढ़ और जिले के सभी नगर पालिका व नगर पंचायतों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर शासकीय अभिलेखों के आधार पर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा उप संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश रायगढ़ को भी कार्रवाई के लिए प्रतिलिपि भेजी गई है। पूरी जांच प्रक्रिया को पूरा कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए अधिकारियों को 15 दिनों की सख्त समय-सीमा दी गई है। प्रशासन प्रत्येक स्वीकृत कॉलोनी की अलग-अलग और बिंदुवार जांच करा रहा है।
जांच के प्रमुख बिंदु और मानक
अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर अपनी जांच रिपोर्ट तैयार करें:
- स्वीकृत ले-आउट के अनुसार ईडब्ल्यूएस भूमि वास्तव में मौके पर आरक्षित है या नहीं।
- निर्धारित ईडब्ल्यूएस भूखंडों का उपयोग नियमों के मुताबिक किया गया है या नहीं।
- पात्र हितग्राहियों को भूखंड दिए गए हैं या उन्हें किसी अन्य को बेच दिया गया है।
- निर्धारित भूमि का नामांतरण संबंधित सक्षम प्राधिकारी या नगरीय निकाय के पक्ष में हुआ है अथवा नहीं।
- जहां भूमि आरक्षित नहीं पाई जाती या नियमों का उल्लंघन मिलता है, वहां किसकी जिम्मेदारी बनती है।
- प्रत्येक कॉलोनी की कुल भूमि, ईडब्ल्यूएस हेतु निर्धारित भूमि, मौके की वास्तविक स्थिति, नामांतरण और विक्रय से जुड़ी तमाम जानकारियां।
वर्षवार कॉलोनियों की जांच सूची
जिला प्रशासन द्वारा वर्षवार चिन्हित किए गए प्रमुख प्रकरणों और कॉलोनियों का विवरण इस प्रकार है:
- वर्ष 2015: मेसर्स गणपती रियालिटी सक्ती की लामीदरहा स्थित कॉलोनी तथा संजय भूषण पाण्डेय व दीपक अग्रवाल की ग्राम सहसपुर स्थित कॉलोनी के स्वीकृत प्रावधानों और निर्माण कार्यों की जांच।
- वर्ष 2016: श्री केशव टाउनशीप प्राइवेट लिमिटेड की बोईरदादर स्थित कॉलोनी और शौर्य प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड की बड़े रामपुर स्थित कॉलोनी के ईडब्ल्यूएस व नामांतरण अभिलेखों का परीक्षण।
- वर्ष 2017: आकर्षण बिल्डर्स (जगतपुर), मेसर्स एलायंस डेवलपर्स (छातामुड़ा), श्री भाटिया वाटिका (मिट्ठूमुड़ा) और पी.जी. इंटरप्राइसेस (बड़े अतरमुड़ा) की कॉलोनियां जांच के दायरे में हैं।
- वर्ष 2019: दया सागर मिश्रा (बड़े अतरमुड़ा), श्री सांई ग्रुप (बेन्द्राचुंआ) और शौर्य प्रोपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड (बड़े रामपुर) की कॉलोनियों के ईडब्ल्यूएस, आश्रय शुल्क और नामांतरण अभिलेखों की जांच।
- वर्ष 2020: बड़े अतरमुड़ा के दया सागर मिश्रा व हलधर चौधरी के प्रकरणों में आश्रय शुल्क प्रविष्टियां, छोटे अतरमुड़ा में मेसर्स जय मां दुर्गा डेवलपर्स तथा गोवर्धनपुर में मेसर्स वैद्यनाथ बिल्डर्स की कॉलोनियों की जांच।
- वर्ष 2021: मेसर्स हरप्रीत इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड (घरघोड़ा व कसैया), सुकुलभठली में रजत अग्रवाल, पंडरीपानी में एपेक्स रियल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा अमलीभौना में मेसर्स टियान्स बिल्डर्स के प्रकरण।
- वर्ष 2022: अमलीभौना (बी.आर. एसोसिएट और टियान्स बिल्डर्स), छींच (सिमर इंटरप्राइसेस), बेन्द्राचुंआ (श्री सांई ग्रुप), गोवर्धनपुर (श्री केशव टाउनशीप) और छातामुड़ा (श्रीराम प्रोपर्टीज)।
- वर्ष 2023: छातामुड़ा (महालक्ष्मी), बोईरदादर (श्री साईं कृपा, आशियाना इस्टैट), छोटे अतरमुड़ा (अमोलक सिंह), कसैया-घरघोड़ा (बजरंग अग्रवाल), बड़े रामपुर (ओम साईं बिल्डर्स, एपेक्स रियल इंफ्रा), बड़े अतरमुड़ा (हाईटेक बिल्डर्स, श्याम बिल्डकॉन, अभिषेक अग्रवाल), अमलीभौना (आर.आर. डेवलपर्स, टियान्स बिल्डर्स), मिठ्ठूमुड़ा (गुरूकृपा इन्फ्रा), कौहाकुंडा (श्री सांई ग्रुप), छातामुड़ा सहदेवपाली (अग्रसेन रियल स्टेट) और घरघोड़ा (रंजीत भाटिया) के प्रकरण।
- वर्ष 2024: बोईरदादर (अनिल गोयल), जोरापाली (श्री सांई आनंद विहार), बेलादुला (रूपचंद अग्रवाल, शंकर अग्रवाल), बड़े रामपुर (ओम साईं बिल्डर्स), मिठ्ठूमुड़ा (एच.पी. डेवलपर्स), सांगीतराई (टियान्स बिल्डर्स), अमलीभौना (आर.आर. डेवलपर्स) और बड़े अतरमुड़ा (पी.जी. इंटरप्राइसेस) की कॉलोनियों में 9 प्रतिशत विकसित भूखंडों व ईडब्ल्यूएस प्रावधानों की जांच।
- वर्ष 2025: बेलादुला (एलायंस डेवलपर्स), विजयपुर (श्री सांई आनंद विहार), छोटे अतरमुड़ा (श्याम डेवलपर्स), बड़े अतरमुड़ा (कैलाश अग्रवाल, हाईटेक बिल्डर्स), दरोगामुड़ा (नितिन गोयल) तथा दरोगामुड़ा व कोसमनारा (बालाजी डेवलपर्स) के प्रकरण।
- वर्ष 2026: कौहाकुंडा (बालाजी प्रोजेक्ट्स), विजयपुर (सालासार बिल्डकॉन, सुरेश रोहड़ा, नीरज अग्रवाल, दीपक एक्का) और सांगीतराई (टियान्स कैपिटल सिटी फेस-3/टियान्स बिल्डकॉन) के नवीनतम स्वीकृत प्रकरण।
प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए निर्धारित भूमि का मुख्य उद्देश्य पात्र और जरूरतमंद परिवारों को नियमानुसार लाभ पहुंचाना है। स्वीकृत कॉलोनियों में इन प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराना प्रशासन की प्राथमिकता है, और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर दोषी कॉलोनाइजरों व संबंधित लोगों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।











