रायगढ़ : सिलाई सीखकर आत्मनिर्भर बनेंगी मौहापाली की महिलाएं, जिंदल फाउंडेशन ने शुरू किया प्रशिक्षण
30 महिलाएं ले रहीं प्रशिक्षण, तीन माह तक मिलेगा निःशुल्क प्रशिक्षण; इससे पहले मशरूम उत्पादन का भी दिया जा चुका है प्रशिक्षण
रायगढ़, 7 अक्टूबर। महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जिंदल फाउंडेशन द्वारा ग्राम पंचायत मौहापाली में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की शुरुआत की गई है। स्वावलंबन परियोजना के तहत शुरू किए गए इस प्रशिक्षण में गांव की 30 महिलाएं शामिल हो रही हैं। महिलाओं को तीन माह तक निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद महिलाएं सिलाई के क्षेत्र में दक्ष होकर अपने गांव में काम शुरू कर सकेंगी और अपनी आय का साधन विकसित कर सकेंगी। प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को हुनर से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
स्वरोजगार के लिए लगातार दिए जा रहे प्रशिक्षण
जिंदल पावर द्वारा प्लांट एवं माइंस प्रभावित क्षेत्रों में जिंदल फाउंडेशन के माध्यम से स्वरोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में ग्रामीणों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने के साथ अलग-अलग कौशल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।
मौहापाली में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र के शुभारंभ कार्यक्रम में वीपी नीरज सक्सेना, एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट सीएसआर ऋषिकेश राय शर्मा, ग्राम पंचायत मौहापाली के सरपंच श्याम कुमार राठिया, ग्राम गौटिया अमर साय राठिया, सीएसआर मैनेजर शीतल पटेल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
‘हुनर आत्मनिर्भर बनने का माध्यम’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वीपी नीरज सक्सेना ने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान और योग्यता देती है, लेकिन हुनर उसे उस ज्ञान को व्यवहार में उतारने और आत्मनिर्भर बनने में मदद करता है। उन्होंने महिलाओं से प्रशिक्षण को गंभीरता और लगन के साथ लेने की अपील की।
उन्होंने कहा कि तीन माह के इस प्रशिक्षण के बाद महिलाएं सिलाई का काम गांव में करने के साथ-साथ आवश्यकता और अवसर के अनुसार बाहर भी काम कर सकेंगी। उनके अनुसार यह प्रशिक्षण महिलाओं के लिए आय का नया जरिया विकसित करने में मददगार हो सकता है।
मशरूम उत्पादन के बाद अब सिलाई का प्रशिक्षण
सरपंच श्याम कुमार राठिया ने कहा कि जिंदल पावर की ओर से ग्रामीण महिलाओं के लिए पहले भी मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है। अब सिलाई का प्रशिक्षण मिलने से महिलाओं को स्वरोजगार का एक और अवसर मिलेगा।
एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट सीएसआर ऋषिकेश शर्मा ने कहा कि महिलाएं सिलाई का प्रशिक्षण लेकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण में बेहतर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को आकृति सेंटर में सिलाई से जुड़े काम का अवसर भी मिल सकता है। उन्होंने महिलाओं से नियमित रूप से प्रशिक्षण लेने और इसमें पूरी मेहनत करने का आग्रह किया।
सीएसआर मैनेजर शीतल पटेल ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समूह की महिलाएं और ग्रामीण उपस्थित रहे।
