रायगढ़ : EWS भूमि नियमों के उल्लंघन पर ग्रीन पार्क कॉलोनी का रजिस्ट्रेशन रद्द, प्लॉट की खरीदी-बिक्री पर रोक

बड़े अतरमुड़ा की कॉलोनी पर प्रशासन की कार्रवाई, अब तक हुए भूखंडों के अंतरण की भी होगी जांच

रायगढ़, 9 सितंबर 2026। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS के लिए आरक्षित भूमि के प्रावधानों का पालन नहीं करने के मामले में रायगढ़ जिला प्रशासन ने ग्राम बड़े अतरमुड़ा स्थित ग्रीन पार्क कॉलोनी के खिलाफ कार्रवाई की है। जांच में नियमों से जुड़ी खामियां सामने आने के बाद कॉलोनी विकासकर्ता अभिषेक अग्रवाल का कॉलोनी रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया गया है।

इसके साथ ही कॉलोनी के भूखंडों की खरीदी-बिक्री पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है।

15 प्रतिशत EWS भूमि को लेकर मांगा गया था रिकॉर्ड

प्रशासन के अनुसार, जांच के दौरान कॉलोनी विकासकर्ता से कॉलोनी में निर्धारित 15 प्रतिशत EWS भूमि के संबंध में दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगा गया था।

विकासकर्ता की ओर से जवाब में ग्राम नवापाली, तहसील पुसौर की एक भूमि को EWS के लिए आरक्षित बताया गया। हालांकि जांच में उक्त भूमि राजस्व रिकॉर्ड में विकासकर्ता के नाम पर कृषि भूमि के रूप में दर्ज मिली।

प्रशासन के मुताबिक, इस भूमि को सक्षम प्राधिकारी को हस्तांतरित किए जाने से संबंधित आवश्यक दस्तावेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए।

निर्धारित क्षेत्र में नहीं मिली EWS भूमि

जांच में यह भी सामने आया कि ग्रीन पार्क कॉलोनी के लिए बताई गई EWS भूमि निर्धारित कॉलोनी क्षेत्र की सीमा में नहीं थी। दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच के बाद प्रशासन ने इसे नियमों के अनुरूप नहीं माना।

इन्हीं अनियमितताओं के आधार पर कॉलोनी विकासकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

कॉलोनी का रजिस्ट्रेशन निरस्त, प्लॉट बिक्री पर रोक

प्रशासन ने ग्राम बड़े अतरमुड़ा में खसरा नंबर 198/5, रकबा 1.978 हेक्टेयर पर विकसित ग्रीन पार्क कॉलोनी का कॉलोनी रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।

साथ ही कॉलोनी के भूखंडों के क्रय-विक्रय और अंतरण पर आगामी आदेश तक प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में अब प्रशासन के अगले आदेश तक इन भूखंडों के नए हस्तांतरण पर रोक रहेगी।

पहले बिक चुके प्लॉट भी जांच के दायरे में

प्रशासन ने केवल नए भूखंडों की बिक्री पर रोक लगाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। तहसीलदार रायगढ़ को निर्देश दिया गया है कि कॉलोनी विकासकर्ता द्वारा अब तक किए गए भूखंडों के अंतरण की भी जांच की जाए।

तहसीलदार को इस संबंध में करीब एक महीने के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करना होगा। रिपोर्ट में अब तक हुए भूखंडों के हस्तांतरण और संबंधित रिकॉर्ड की स्थिति का परीक्षण किया जाएगा।

दांडिक कार्रवाई की भी तैयारी

जांच प्रतिवेदन के आधार पर कॉलोनी विकासकर्ता के खिलाफ छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 के तहत आगे दांडिक कार्रवाई की जा सकती है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कॉलोनी विकास और EWS भूमि से संबंधित वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विकासकर्ता के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

2015 से स्वीकृत कॉलोनियों की होगी जांच

ग्रीन पार्क कॉलोनी की कार्रवाई के साथ ही जिला प्रशासन ने जिले में वर्ष 2015 से 2026 तक स्वीकृत कॉलोनियों की भी जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।

इस व्यापक जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित कॉलोनियों में EWS के लिए निर्धारित भूमि वास्तव में उपलब्ध है या नहीं, उसका नामांतरण और हस्तांतरण किस स्थिति में है, मौके पर उसका उपयोग क्या हो रहा है और उससे जुड़े भूखंडों का क्रय-विक्रय किस प्रकार हुआ है।

नियमों का पालन नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जिले की अन्य कॉलोनियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं। जांच के दौरान EWS भूमि अथवा कॉलोनी विकास से जुड़े नियमों में गड़बड़ी मिलने पर संबंधित कॉलोनाइजर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य कॉलोनी विकास में निर्धारित वैधानिक प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना और EWS वर्ग के लिए आरक्षित भूमि की वास्तविक उपलब्धता एवं उपयोग की स्थिति स्पष्ट करना है।

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