जनसुनवाई के दौरान हुई निदनीय व अप्रिय घटना की प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने की कड़ी निंदा,दोषियों को सज़ा देने की मांग,

ग्रामीणों की माने तो हमारे शांति पूर्ण धरना प्रदर्शन को बदनाम करने की साज़िश


रायगढ़/तामनार : जिले के तमनार क्षेत्र में प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध में शांतिपूर्ण धरने पर बैठे 14 गांवों के ग्रामीणों ने 27 दिसंबर 2025 को घटित एक अत्यंत शर्मनाक, निंदनीय और अमानवीय घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। इस घटना में एक महिला आरक्षक के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिसने पूरे क्षेत्र की जनता को गहरे आघात में डाल दिया है।इसका असर प्रदेश में भी चर्चा का बिषय बना रहा है वही राज्य सरकार भी इस अमानवीय घटना से सते में आ गईं और सोचने पर मजबूर कर दिया खुद मुख्य्मंत्री ने मामले की जांच की बात कही थी


आखिरकार 14 गांवों के ग्रामीणों ने इस संबंध में एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट रूप से कहा है कि इस घृणित घटना को अंजाम देने वाले असामाजिक तत्वों से उनका कोई भी संबंध नहीं है। ग्रामीणों ने एक स्वर में इस कृत्य की भर्त्सना करते हुए कहा कि यह न केवल मानवता के विरुद्ध है, बल्कि कानून व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में शामिल सभी दोषियों की पहचान कर उन्हें कठोरतम सज़ा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।
ग्रामीणों का कहना है कि तमनार क्षेत्र के 14 गांवों के निवासी पिछले 20 से 21 दिनों से पूरी तरह शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से अपने अधिकारों के लिए आंदोलन कर रहे हैं। यह आंदोलन जनसुनवाई से जुड़ी चिंताओं, पर्यावरण, आजीविका और स्थानीय जनता के भविष्य से संबंधित सवालों को लेकर किया जा रहा है। ऐसे में आंदोलन से जुड़े लोगों पर हिंसा या अमानवीय कृत्य में शामिल होने का आरोप पूरी तरह निराधार, भ्रामक और असत्य है।


ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि यह घटना शांतिपूर्ण जनआंदोलन को बदनाम करने और जनता के जायज़ संघर्ष को कमजोर करने की एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा हो सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि आंदोलन के दौरान बार-बार असामाजिक तत्वों द्वारा घुसपैठ करने का प्रयास किया गया, ताकि माहौल को बिगाड़ा जा सके और आंदोलन को हिंसक रूप देने की कोशिश हो। हालांकि, ग्रामीणों की सजगता, एकता और अनुशासन के कारण ऐसे सभी प्रयास अब तक विफल रहे हैं।
गांवों के ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष, सूक्ष्म और पारदर्शी जांच कराई जाए। जांच में यह स्पष्ट किया जाए कि घटना के पीछे वास्तविक दोषी कौन हैं और किस उद्देश्य से इस तरह का कृत्य किया गया। साथ ही, सच्चाई को आम जनता के सामने लाया जाए, ताकि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहे निर्दोष ग्रामीणों की छवि को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को नाकाम किया जा सके।


ग्रामीणों ने अंत में यह भी कहा कि वे कानून में पूर्ण विश्वास रखते हैं और किसी भी प्रकार की हिंसा, दुर्व्यवहार या अमानवीय कृत्य का समर्थन नहीं करते। उनका संघर्ष केवल अपने संवैधानिक अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए है, जिसे बदनाम करने की किसी भी साज़िश का वे एकजुट होकर विरोध करते रहेंगे।

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