सारदा एनर्जी का बेपरवाह रवैया फ्लाई ऐश के अवैध पाटन से उपजा जन आक्रोश क्या सो रहा है पर्यावरण विभाग
कुड़ेकेला :- मुनाफे की अंधी दौड़ में जब उद्योग इंसानी जिंदगी बेजुबान मवेशियों और उपजाऊ जमीन की बलि चढ़ाने लगें तो उसे विकास नहीं बल्कि विनाश की पटकथा कहा जाता है। रायगढ़ जिले के घरघोड़ा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम टेढ़ा-नवापारा में कुछ ऐसा ही खतरनाक खेल खेला जा रहा है। दर्रा मुड़ा स्थित सारदा एनर्जी प्लांट से निकलने वाले फ्लाई ऐश के निष्पादन में पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है।
बारिश में घुलकर खेतों में पहुंच रहा धीमा जहर
बिना किसी तय मापदंड के जहां तहां डंप की गई यह राखड़ अब ग्रामीणों के लिए आफत बन चुकी है। मानसूनी बारिश के साथ बहकर यह खतरनाक फ्लाई ऐश आसपास के खेतों और टिकरा भूमियों में समा रही है। उपजाऊ जमीन बंजर होने की कगार पर है और फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। केवल भूमि ही नहीं बल्कि इस दूषित पानी और धूल के संपर्क में आने से स्थानीय जनजीवन मवेशियों और पारिस्थितिकी तंत्र पर जानलेवा असर पड़ने की आशंका है।
ग्रामीणों में सुलग रहा असंतोष का लावा:-
अपनी आंखों के सामने जमीन और भविष्य को तबाह होते देख ग्राम टेढ़ा-नवापारा के ग्रामीणों में भारी रोष पनप रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि सारदा एनर्जी को क्षेत्र के लोगों के जन जीवन और स्वास्थ्य से कोई सरोकार नहीं है उनका एकमात्र मकसद जैसे तैसे अपना कचरा ठिकाने लगाना है।
कागजी कार्रवाई या औपचारिक नाटक पर्यवरण विभाग कर रहे शिकायत का इंतजार
मामले की सबसे दुखद और चौंकाने वाली कड़ी जिला पर्यावरण विभाग की कार्यशैली है। जब इस संबंध में विभाग से सवाल किया गया तो जो जवाब मिला वह हैरान करने वाला है। नियम कायदों को दरकिनार कर केवल लिखित शिकायत का इंतजार कर रहे हैं।
विभाग की तयशुदा सुस्त कार्यप्रणाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शिकायत मिलने के बाद टीम मौका मुआयना करेगी फिर वेंडर को इसे सुधारने या हटाने की महज नसीहत और फरमान जारी कर अपनी फाइलों का पेट भर लेगी।
तबाही के बाद जागेगा प्रशासन:-जब बिना मापदंड के फ्लाई ऐश डंप कर खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है तो क्या विभाग को स्वत संज्ञान लेने का अधिकार नहीं है क्या अधिकारी किसी बड़े हादसे या ग्रामीणों के उग्र आंदोलन का इंतजार कर रहे हैं। महज औपचारिकता निभाकर वेंडर को नसीहत देना क्या पर्यावरण संरक्षण की पूरी कार्रवाई मान ली जाए या फिर पर्दे के पीछे का खेल कुछ और ही है।
अब देखना यह होगा कि खबर उजागर होने के बाद रायगढ़ जिला प्रशासन और पर्यावरण विभाग नींद से जागकर सारदा एनर्जी पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करता है या ग्रामीणों को इसी तरह जहर घूंटने पर मजबूर होना पड़ेगा।











