धान खरीदी की तैयारी पूरी: 15 नवंबर से शुरू होगी खरीद, अवैध धान पर निगरानी के लिए 10 चेकपोस्ट सक्रिय

रायगढ़ ।

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प्रदेश में धान खरीदी का सीजन 15 नवंबर से शुरू होने जा रहा है। इस बार प्रशासन ने अवैध धान परिवहन पर सख्त निगरानी रखने के लिए 10 अंतरराज्यीय चेकपोस्ट स्थापित किए हैं। वहीं, चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करने के लिए चार टीमों की तीन-तीन पालियों में ड्यूटी लगाई गई है।

धान खरीदी किसानों से नकद और लिंकिंग प्रणाली के माध्यम से 15 नवंबर से 31 जनवरी तक की जाएगी। इस वर्ष भी खरीदी की अधिकतम सीमा लिंकिंग सहित 21 क्विंटल प्रति एकड़ तय की गई है। जिले की 69 समितियों के तहत 105 उपार्जन केंद्रों में धान खरीदी की जाएगी।

अवैध धान परिवहन पर सख्त निगरानी

जिले की सीमाओं पर बनाए गए चेकपोस्टों में पुलिस, राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें तैनात रहेंगी। ये टीमें 24 घंटे गश्त कर अवैध धान की आवाजाही पर नजर रखेंगी। ऐग्रीस्टेक पोर्टल पर पंजीकृत किसानों से ही सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार धान की खरीदी की जाएगी।

धान खरीदी किसानों की ऋण पुस्तिका के आधार पर पोर्टल आईडी से की जाएगी, जिससे अब उपार्जन केंद्रों में ऋण पुस्तिका साथ लाने की आवश्यकता नहीं होगी।

कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने अधिकारियों की बैठक लेकर उपार्जन केंद्रों की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इंटरस्टेट बॉर्डर, कोचियों और बिचौलियों पर विशेष नजर रखी जाए ताकि अवैध बिक्री को पूरी तरह रोका जा सके।
कलेक्टर ने चेतावनी दी कि खरीदी कार्य में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

सुबह 8 बजे से शुरू होगी टोकन प्रक्रिया

धान खरीदी को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाने के लिए ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप के माध्यम से टोकन जारी करने की प्रक्रिया सुबह 8 बजे से प्रारंभ होगी। सोसाइटी संचालक सुबह 9:30 बजे से टोकन जारी करेंगे। किसान एक बार में अगले 7 खरीदी दिवसों के लिए टोकन प्राप्त कर सकेंगे।

शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर जारी

धान उपार्जन और कस्टम मिलिंग से जुड़ी शिकायतों के समाधान के लिए खाद्य विभाग ने टोल फ्री नंबर 1800-233-3663 जारी किया है। यह राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष के रूप में कार्य करेगा।
धान खरीदी केंद्रों में इस नंबर की जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित की जाएगी, ताकि किसान अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें। प्राप्त शिकायतों का तीन दिनों के भीतर निराकरण किया जाएगा।

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