
पंजाब में और हरियाणा में विद्रोह के संकेत के साथ, अब छत्तीसगढ़ में भी कुछ ऐसे ही आसार देखने को मिल रहें हैं। 10 जनपथ पर रहने वाले कांग्रेस आलाकमान को अब एक और मोर्चे से झटका लगने की संभावना है। सूत्रों ने बताया है कि राज्य के नेतृत्व में बदलाव की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ में आंतरिक कलह की खबरें आ रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता टीएस सिंह देव ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को बदलने के लिए पार्टी आलाकमान के साथ बैठक की मांग की हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वर्तमान में छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रमुख टीएस सिंह देव पहले ही दिल्ली आ चुके हैं और पार्टी आलाकमान के साथ मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि टीएस सिंह देव कुछ बातों को लेकर नाराज चल रहे हैं, जिसके लिए वह दूसरी बार दिल्ली आए हैं।
जब 2017 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सत्ता में आई थी, तब 50-50 फॉर्मूले की खबरें आई थीं, जहां बघेल 2.5 साल सत्ता में रहने के बाद सीएमओ को खाली कर देंगे। सीएम बघेल ने 17 जून को 2.5 साल पूरे किए। हालांकि, कांग्रेस महासचिव पीएल पुनिया ने हाल ही में बताया कि सीएम में बदलाव वाली रिपोर्ट बिलकुल गलत और निराधार हैं।
पंजाब और राजस्थान के अलावा छत्तीसगढ़ एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां इस समय कांग्रेस का शासन है। पंजाब और राजस्थान के गुटों के भीतर आंतरिक दरार की खबरें पहले ही आ चुकी हैं। पंजाब में जहां सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू आमने-सामने हैं, वहीं राजस्थान में डिप्टी सीएम सचिन पायलट इस पार्टी से नाखुश हैं, जिसके कारण कई महीने पहले बगावत हुई थी।
हरियाणा कांग्रेस के विधायक केसी वेणुगोपाल से मिले
सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा खेमे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुमारी शैलजा को लेकर विधायकों के दो गुट बन गए हैं। सूत्रों के अनुसार, हरियाणा के 21 विधायकों ने इस मुद्दे के समाधान के लिए सोमवार को कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल से मुलाकात की। कांग्रेस के 19 विधायकों ने राज्य में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका की मांग की। सबने यह कहा है कि पार्टी के लिए ‘मजबूत नेतृत्व’ की जरुरत है। पीटीआई (PTI) के मुताबिक, 1 जुलाई को पार्टी के हरियाणा प्रभारी विवेक बंसल के साथ नई दिल्ली में हुई बैठक में विधायकों ने यह मुद्दा उठाया कि कांग्रेस के पास पिछले आठ सालों से जिला इकाई का प्रमुख नहीं हैं।
कांग्रेस अभी तक पंजाब की अंदरूनी कलह को नहीं सुलझा पाई
असंतुष्ट कांग्रेस विधायक नवजोत सिंह सिद्धू का मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ टकराव जारी है, जबकि पार्टी नेतृत्व 2022 में पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले एक सही समाधान की तलाश में है। सूत्रों ने जानकारी दी है कि नवजोत सिंह सिद्धू पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किए जाने पर अड़े हैं। सूत्रों के अनुसार, पंजाब के सीएम ने पंजाब में कांग्रेस गुट के भीतर चल रही दिक्क्तों को दूर करने के लिए सिद्धू को अपने मंत्रिमंडल में फिर से शामिल करने की पेशकश की थी। मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कल दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात करने वाले है, जिससे इस पूरे मसले का समाधान निकल सके।



