11 मई को ऑनलाइन फार्मेसी और डोरस्टेप डिलीवरी के खिलाफ देशव्यापी दवाई दुकान बंद

*इस हड़ताल का मुख्य कारण सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन GSR 220(E) और GSR 817(E) को तुरंत वापस लेने की मांग*

*कुछ फार्मेसी चेन और ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दवाइयों पर भारी छूट देने के मुद्दा*

*डोरस्टेप डिलीवरी योजना का  कड़ा विरोध*

चेन्नई: ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने 11 मई 2026 को ‘नेशनल फार्मेसी बंद’ के रूप में देशव्यापी हड़ताल की औपचारिक घोषणा की है।

यह महत्वपूर्ण निर्णय 15 मार्च को राजस्थान के उदयपुर में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में लिया गया। AIOCD के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे ने प्रारंभ में 15 अप्रैल की तारीख प्रस्तावित की थी, लेकिन अप्रैल में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण इसे बदलकर 11 मई कर दिया गया। यह जानकारी संगठन के महासचिव राजीव सिंघल ने फार्माबिज से बातचीत में दी।

यह कदम पारंपरिक रिटेल फार्मेसी सेक्टर और केंद्र सरकार के बीच चल रहे विवाद के चरम को दर्शाता है। बैठक के बाद बातचीत में AIOCD के महासचिव ने ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर सरकार के ढीले रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि ये डिजिटल प्लेटफॉर्म बिना फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाइयां वितरित करते हैं, जिससे सेल्फ-मेडिकेशन बढ़ता है और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक समस्या को बढ़ावा मिलता है।

इस हड़ताल का मुख्य कारण सरकार द्वारा जारी नोटिफिकेशन GSR 220(E) और GSR 817(E) को तुरंत वापस लेने की मांग है। AIOCD का कहना है कि ये ड्राफ्ट नियम ऐसे loopholes प्रदान करते हैं, जिससे ई-फार्मेसी ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के कड़े नियमों से बच निकलती हैं। संगठन का मानना है कि इससे देशभर के 12.40 लाख से अधिक केमिस्ट्स की आजीविका पर खतरा पैदा हो रहा है, क्योंकि ये प्लेटफॉर्म अनियंत्रित बिक्री और आक्रामक डिस्काउंटिंग कर रहे हैं।

ई-फार्मेसी के अलावा, संगठन दवाइयों की डोरस्टेप डिलीवरी योजना का भी कड़ा विरोध कर रहा है। राजीव सिंघल ने बताया कि यह बंद सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिकों तक सीधे दवाइयां पहुंचाने की योजना के खिलाफ भी है। उनका कहना है कि इससे स्थानीय फार्मासिस्ट की पेशेवर निगरानी खत्म हो जाएगी और पारंपरिक रिटेल सेक्टर और कमजोर होगा।

कुछ फार्मेसी चेन और ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दवाइयों पर भारी छूट देने के मुद्दे पर भी AIOCD ने कड़ा रुख अपनाया है। संगठन का मानना है कि इस तरह की छूट बाजार को अस्थिर करती है और फार्मास्यूटिकल व्यापार के पेशेवर मानकों को नुकसान पहुंचाती है। यह प्रथा स्वतंत्र फार्मेसियों के अस्तित्व के लिए हानिकारक मानी जा रही है।

उदयपुर में हुई इस कार्यकारिणी बैठक में देशभर से 250 से अधिक सदस्यों ने भाग लिया, जहां बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ संगठन के आंतरिक मुद्दों और राज्य स्तरीय समस्याओं पर भी चर्चा हुई।

अस्पतालों में काम करने वाले फार्मासिस्टों के अनुसार, हालांकि यह बंद रिटेल और होलसेल मेडिकल स्टोर्स का पूर्ण बंद होगा, लेकिन अस्पतालों के अंदर स्थित इमरजेंसी फार्मेसी मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खुली रहेंगी। अगली कार्यकारिणी बैठक आंध्र प्रदेश के अमरावती में आयोजित की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

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