43वां श्री श्याम महोत्सव का भव्य शुभारंभ कल से शहर में तीन दिवसीय श्री श्याम महोत्सव की रहेगी धूम

अद्वितीय एवं अतुलनीय होगी श्याम दरबार की शोभा अखण्ड ज्योत है अपार माया-श्याम देव की परबल छाया

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रायगढ़। जिले की प्रतिष्ठित संस्था श्री श्याम मंडल के तत्वावधान में तीन दिवसीय विराट श्री श्याम महोत्सव का भव्य शुभारंभ 13 नवंबर शनिवार को होगा। पहले दिन शनिवार कोदोपहर 1 बजे से श्री श्याम अखंड ज्योति पाठ होगा, जो देर रात तक चलेगा। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर श्री श्याम बाबा के अखंड पाठ व जयकारे से गूंज उठेगा।
श्री श्याम मंडल के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल व प्रचार मंत्री महावीर अग्रवाल ने बताया कि संजय काम्प्लेक्स स्थित श्री श्याम मंदिर में श्री श्याम महोत्सव की तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस बार कोलकाता के कारीगरों द्वारा फूलों से आकर्षक श्रृंगार किया गया है। महिलाओं एवं पुरूषों के लिए अलग-अलग बैठने की व्यवस्था की गई है। श्री कृष्ण अवतार श्री श्याम प्रभु की पोषाक मथुरा से विशेष रूप से मंगवाई गई है। अत्याधुनिक साज सज्जा के साथ मंदिर के मध्य में भव्य खाटू वाले श्री कृष्ण अवतार श्री श्याम बाबा का मनमोहक दरबार होगा। वहीं दरबार के दायें औघड़दानी आशुतोष भगवान शंकर एवं बांये महाबली वीर श्री हनुमान जी की भी शोभायमान होंगे, जिनके चित्ताकर्षक रूप की शोभा अतुलनीय होगी। इस शुभ अवसर पर श्याम मंडल द्वारा रायगढ़ एवं बाहर के सभी भक्तों को अधिक से अधिक संख्या में पहुंच कर दर्शन लाभ लेकर पुण्य अर्जित करने की अपील की गई है ।

श्याम पाठ में द्वापर से लेकर कलियुग तक का वर्णन
श्री अग्रवाल ने बताया कि इस सुन्दर संगीतमय अखंड ज्योति पाठ में कृष्णावतार श्री श्याम प्रभु के द्वापर युग से लेकर कलियुग तक की समस्त लीलाओं का सम्पूर्ण समावेश है कि कैसे श्रीकृष्ण द्वारा बरबरीक को अपना प्यारा नाम श्याम बाबा देकर कलियुग में घर-घर पूजित होने का विस्तृत कहानी का चरित्र चित्रण भजनों के साथ प्रदर्शित होगा। यह पाठ अनेक कष्टों को दूर कर चमत्कारिक मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। यह पाठ दोपहर 1 बजे से आरंभ होकर देर शाम तक चलेगा। रायगढ़ के सभी भक्तों को एक यादगार प्रस्तुति देखने को मिलेगी। उन्होंने बताया कि कार्तिक शुदी एकादशी श्री श्याम प्रभु के जन्म दिन के रूप में भव्य रूप में देश विदेशों में मनाई जाती है एवं फाल्गुन शुक्ल पक्ष एकादशी श्याम प्रभु के प्रकट महोत्सव के रूप में धूमधाम से मनाई जाती है।
सुमिरन मात्र से दूर हो जाता है भक्तों का संकट
पुराणों के अनुसार महाभारत के युद्ध के दौरान वीर बर्बरीक ने अपनी अद्भुत बाण कला का कौशल दिखा कर भगवान श्रीकृष्ण को अचंभित किया एवं श्रीकृष्ण के कहने पर अपने शीश का दान देकर भगवान को प्रसन्न किया। महाभारत के बाद श्री कृष्ण द्वारा बर्बरीक के शीश को स्वयं में समाहित कर कलियुग में बर्बरीक को अपना प्यारा नाम श्याम समर्पित कर अपने ही नाम से घर घर पूजित होने का वरदान वीर बर्बरिक को श्री कृष्ण ने दिया। श्री कृष्ण ने अपनी 16 कलाओं का अवतारी होने एवं कलियुग में सुमिरन मात्र से तुम्हारे भक्तों का संकट क्षण में दूर होने का भी शुभाशीर्वाद प्रदान किया। वीर बर्बरीक कलियुग के प्रथम चरण में राजस्थान के सीकर जिले के खाटू धाम में श्री कृष्ण अवतार लेकर प्रकट हुए जो आज खाटूवाले श्री श्याम बाबा के रूप में जगविख्यात है। आज देश विदेश में श्री श्याम प्रभुु के करोड़ों की संख्या में अनुयायी भक्त हैं।

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