8 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली, जानें लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व
रविवार को देशभर में मनेगा रोशनी का पर्व, मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा से जुड़ी हैं सुख-समृद्धि की मान्यताएं; घरों में दीप सजाने और पूजन की तैयारियां पूरी
नई दिल्ली। दीपों और खुशियों का महापर्व दीपावली इस वर्ष 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। कार्तिक अमावस्या के अवसर पर मनाए जाने वाले इस पर्व में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दीपावली की शाम प्रदोष काल में विधि-विधान से लक्ष्मी-गणेश पूजन करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
धनतेरस के साथ पांच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत हो चुकी है। 7 नवंबर को छोटी दीपावली यानी नरक चतुर्दशी मनाई जा रही है, जबकि 8 नवंबर को मुख्य दीपावली का पर्व मनाया जाएगा।
लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त जानना क्यों है जरूरी?
दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए प्रदोष काल को विशेष महत्व दिया जाता है। इस दौरान मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। पूजा के लिए शुभ समय और मुहूर्त की जानकारी स्थानीय पंचांग के अनुसार देखना उचित माना जाता है।
दीपावली पर ऐसे करें मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा
दीपावली के दिन पूजा से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई कर विशेष सजावट की जाती है। पूजा की सामान्य विधि इस प्रकार है:
- घर की साफ-सफाई: घर के मुख्य द्वार और पूजा स्थल को साफ कर फूलों, रंगोली और तोरण से सजाएं।
- पूजा चौकी तैयार करें: उत्तर या पूर्व दिशा में चौकी रखकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- कलश स्थापना: जल से भरा कलश स्थापित करें। उसमें सुपारी और सिक्का डालकर आम के पत्ते और नारियल रखें।
- गणेश पूजन: सबसे पहले भगवान गणेश का आवाहन कर उन्हें फूल, अक्षत, दूर्वा और धूप-दीप अर्पित करें।
- मां लक्ष्मी का पूजन: मां लक्ष्मी को फूल, कमल, अक्षत, फल और मिठाई अर्पित कर श्रद्धापूर्वक पूजा करें।
- भगवान कुबेर की पूजा: धन और समृद्धि की कामना के साथ भगवान कुबेर का पूजन करें।
- भोग लगाएं: देवी-देवताओं को फल, मिठाई, खीर और पंचमेवा का भोग अर्पित करें।
- दीपक जलाएं: घर के मुख्य द्वार, आंगन, बालकनी और अन्य स्थानों पर दीपक जलाएं।
- आरती करें: मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
- प्रसाद वितरण: पूजा के बाद परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों को प्रसाद वितरित करें।
दीपावली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में मां लक्ष्मी को धन, वैभव और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के देवता हैं। इसी वजह से दीपावली पर दोनों की एक साथ पूजा करने की परंपरा है।
कई परिवारों में इस अवसर पर मां सरस्वती और भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है। मान्यता है कि दीपावली की रात श्रद्धापूर्वक पूजा करने से परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है।
भगवान राम के अयोध्या लौटने से जुड़ी है दीपावली की परंपरा
दीपावली मनाने के पीछे कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। सबसे प्रमुख मान्यता भगवान श्रीराम के 14 वर्ष का वनवास पूरा कर माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटने से जुड़ी है।
मान्यता है कि भगवान राम के आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाया था। तभी से कार्तिक अमावस्या पर दीप जलाकर दीपावली मनाने की परंपरा चली आ रही है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है।
एक अन्य धार्मिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक अमावस्या के दिन मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसी कारण दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।
देशभर में अलग-अलग परंपराओं से मनाया जाता है पर्व
भारत के अलग-अलग राज्यों में दीपावली को स्थानीय परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है। उत्तर भारत में भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में दीप जलाए जाते हैं। पश्चिम बंगाल में इसी रात मां काली की पूजा होती है, जिसे काली पूजा कहा जाता है।
सिख समुदाय के लिए यह पर्व बंदी छोड़ दिवस के रूप में भी महत्वपूर्ण है। वहीं जैन धर्म के अनुयायी दीपावली को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में मनाते हैं।
दीपावली केवल रोशनी और खुशियों का त्योहार नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा, आस्था और आपसी सद्भाव का भी प्रतीक है।























































