रायगढ़: महापौर पद के लिए कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों पर मंथन तेज

रायगढ़। नगर निगम चुनावों को लेकर कांग्रेस में सरगर्मी तेज हो गई है। महापौर पद के लिए अनुसूचित जाति (एसी) आरक्षित होने के बाद कई दावेदारों ने अपनी दावेदारी पेश की है। जिला कांग्रेस कार्यालय में लगातार नए-नए नाम सामने आ रहे हैं, जिनमें से कुछ पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं जिनका कोई जनाधार नहीं है, लेकिन वे भी मौके का लाभ उठाने की कोशिश में जुटे हैं।

पुराने चेहरे जानकी अमृत कारजू पर फिर से भरोसा जता सकती है कांग्रेस

सूत्रों के मुताबिक, पूर्व महापौर जानकी अमृत कारजू का नाम प्रमुख रूप से चर्चा में है। पार्टी के अनुभवी नेताओं का एक बड़ा तबका उनके पक्ष में नजर आ रहा है। जानकी अमृत कारजू के कार्यकाल में शहर विकास के लिए कई अहम निर्णय लिए गए थे, जिससे उन्हें स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त है।

उनकी सबसे बड़ी विशेषता गुटबाजी से दूर रहकर संगठनात्मक समन्वय बनाए रखना है। पूर्व विधायक प्रकाश नायक समेत जिला कांग्रेस कमेटी और प्रदेश के वरिष्ठ नेता उनके कामकाज की सराहना करते रहे हैं। पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए कांग्रेस उन्हें दोबारा मौका दे सकती है।

नए चेहरे के रूप में मुरारी भट्ट का नाम भी उभर कर आया

वहीं, महापौर पद के लिए मुरारी भट्ट का नाम भी तेजी से चर्चा में है। वार्ड नंबर 37 से पार्षद के रूप में लगातार तीन बार (15 वर्षों) से चुनाव जीतते आ रहे मुरारी भट्ट की छवि साफ-सुथरी मानी जाती है। वे कांग्रेस की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेते रहे हैं और पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रहे हैं।

मुरारी भट्ट का समाज में एक मजबूत पकड़ है और वे बुद्धिजीवियों के बीच लोकप्रिय हैं। उनका वार्ड परिसीमन से पहले खरसिया विधानसभा क्षेत्र में आता था, जहां से स्व. नंद कुमार पटेल चुनाव लड़ते थे। मुरारी भट्ट और उनके परिवार के स्व. नंद कुमार पटेल से करीबी संबंध रहे हैं और वर्तमान में भी उनका जुड़ाव विधायक उमेश नंदकुमार पटेल से बना हुआ है।

निर्णय प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के हाथ में

दोनों ही संभावित प्रत्याशी पूर्व मंत्री एवं खरसिया विधायक उमेश नंदकुमार पटेल के करीबी माने जाते हैं। हाल ही में नरेंद्र नेगी को जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) बनाए जाने के बाद यह साफ संकेत मिलता है कि निकाय चुनावों में नंदेली हाउस की मजबूत पकड़ बनी रहेगी।

ऐसे में कांग्रेस इन दोनों नामों में से किसी एक पर महापौर पद के लिए भरोसा जता सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय प्रदेश नेतृत्व के हाथ में होगा। आने वाले दिनों में पार्टी का रुख स्पष्ट होने की संभावना है।

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