
रायगढ़ । देशभर में लागू जीएसटी सुधारों के बाद कई वस्तुओं के कर दरों में बदलाव किया गया है। इनमें कोयला पर लगने वाला जीएसटी 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि पर्यावरण क्षतिपूर्ति उपकर (सेस) को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। बावजूद इसके, कुछ कंपनियों ने अभी तक अपने बिलिंग सिस्टम में नए नियमों को अपडेट नहीं किया है।
मिली जानकारी के अनुसार, एमसीएल (महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड) से कोयला लेकर आ रहे वाहनों के बिलों में अब भी 5 प्रतिशत जीएसटी ही दर्ज किया गया था। इस पर स्टेट जीएसटी टीम ने जांच कार्रवाई करते हुए तीन ट्रेलरों को जब्त कर दंडात्मक कार्रवाई की है।
सूत्रों के अनुसार, सारडा एनर्जी कंपनी ने एमसीएल से कोयला खरीदा था। जांच के दौरान जब टीम ने बिलों की जांच की तो उसमें सिर्फ 5 प्रतिशत जीएसटी लागू पाया गया, जबकि वर्तमान दर 18 प्रतिशत होनी चाहिए थी। टीम ने तत्काल वाहनों को जब्त कर पेनाल्टी लगाई, जिसके बाद कंपनी ने अपने बिलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए मोहलत मांगी है।
अधिकारियों का कहना है कि यह समझ से परे है कि एमसीएल जैसी बड़ी इकाई में नए जीएसटी सुधार अब तक पूरी तरह लागू क्यों नहीं किए गए।
जानकारों के मुताबिक, पहले कोयले पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगता था, जबकि मशीनरी मरम्मत, मालगाड़ी किराया जैसी इनपुट सेवाओं पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूल किया जाता था। इससे कंपनियों के पास अप्रयुक्त इनपुट टैक्स क्रेडिट जमा हो जाता था और उनका पैसा फंस जाता था।
अब 18 प्रतिशत की समान दर लागू होने से यह समस्या समाप्त हो गई है। साथ ही, 400 रुपये प्रति टन उपकर हटाने से सस्ते कोयले पर कर का बोझ कम हुआ है, जिससे छोटी फैक्ट्रियों को राहत मिलेगी।



