
रायगढ़/— जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत चल रहा राशनकार्ड सत्यापन अभियान साल के अंत तक भी पूरी तरह मुकम्मल नहीं हो सका है। खाद्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार करीब 20 हजार राशनकार्डों का डाटा अब भी विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाया है, जिससे सत्यापन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि धान खरीदी कार्य में कर्मचारियों की व्यापक ड्यूटी लगाए जाने के कारण सत्यापन की रफ्तार धीमी पड़ गई। इसी वजह से बड़ी संख्या में हितग्राहियों से संबंधित आवश्यक जानकारियां अब तक संकलित नहीं हो सकी हैं। हालांकि विभाग का दावा है कि इन 20 हजार हितग्राहियों को फिलहाल राशन वितरण से वंचित नहीं किया गया है, लेकिन इससे अपात्र लोगों के लाभ उठाने की आशंका और भी बढ़ गई है।
गलत जानकारी देने वालों पर कार्रवाई नहीं
सत्यापन के दौरान यह भी सामने आया है कि राशनकार्ड बनवाते समय कई उपभोक्ताओं ने गलत अथवा अपूर्ण जानकारी दी, बावजूद इसके अब तक ऐसे मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे पूरी प्रक्रिया पर निगरानी की कमी और नियमों में ढिलाई साफ झलकती है।
एक लाख से ज्यादा कार्ड तय मानकों पर खरे नहीं
खाद्य विभाग द्वारा जिले में कुल 3 लाख 37 हजार 807 राशनकार्डों का सत्यापन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में हितग्राही शासन के तय पात्रता मानकों से बाहर पाए गए। जांच में सामने आया कि—
- 2,378 हितग्राही निष्क्रिय या अमान्य आधार नंबर वाले हैं
- 2,367 हितग्राहियों की वार्षिक आय 6 लाख रुपये से अधिक पाई गई
- 23 उपभोक्ताओं का वार्षिक कारोबार 25 लाख रुपये से ज्यादा है
- 207 लोग किसी संस्था या कंपनी में निदेशक/संचालक के पद पर कार्यरत हैं
- 1 लाख 58 हजार 487 कृषक उपभोक्ताओं के पास 1 हेक्टेयर से अधिक भूमि है
इन सभी श्रेणियों को मिलाकर एक लाख से अधिक राशनकार्ड संदिग्ध श्रेणी में पाए गए हैं, जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत पात्र नहीं माने जाते।
आंकड़ों में उलझन, आगे की कार्रवाई पर संशय
विभागीय जानकारी के मुताबिक करीब 1 लाख 39 हजार राशनकार्डों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि शेष 20 हजार कार्डों की जानकारी अधूरी है। ऐसे में सवाल उठता है कि अपूर्ण डाटा के आधार पर अपात्रों की पहचान और आगे की कार्रवाई कैसे की जाएगी।
शासन के नियम स्पष्ट हैं कि 6 लाख रुपये से अधिक आय, 1 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि, 25 लाख रुपये से अधिक कारोबार या किसी निजी/सरकारी संस्था में उच्च पद पर कार्यरत व्यक्ति राशनकार्ड के पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद ऐसे कार्डों का सक्रिय रहना व्यवस्था में गंभीर खामी की ओर इशारा करता है।
कार्रवाई का इंतजार
खाद्य विभाग का कहना है कि धान खरीदी समाप्त होते ही शेष डाटा एंट्री और सत्यापन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। लेकिन गलत जानकारी देकर कार्ड बनवाने वालों पर कार्रवाई को लेकर स्थिति अब भी अस्पष्ट बनी हुई है। समयबद्ध सत्यापन, पारदर्शी आंकड़े और सख्त कदम ही पीडीएस व्यवस्था की विश्वसनीयता बहाल कर सकते हैं, अन्यथा अपात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहेंगे।



