
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के मेडिकल छात्रों के लिए राहत और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मेडिकल PG (पोस्ट ग्रेजुएट) पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर अपने पुराने आदेश में बड़ा बदलाव कर दिया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले छात्रों को संस्थागत कोटा के तहत आरक्षण देना पूरी तरह वैधानिक है।
इस फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से MBBS पास करने वाले छात्रों को मैरिट के आधार पर 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।
डिवीजन बेंच का अहम फैसला
यह महत्वपूर्ण आदेश चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने दिया है। कोर्ट ने अपने पहले के उस आदेश को संशोधित कर दिया, जिसमें राज्य सरकार को श्रेणी के आधार पर भेदभाव न करने का निर्देश दिया गया था।
अब हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि संस्थागत कोटा के तहत आरक्षण देना कानूनन सही है, जिससे राज्य के मेडिकल छात्रों को सीधा फायदा होगा।
किस याचिका से शुरू हुआ पूरा मामला?
दरअसल, शुभम विहार निवासी डॉ. समृद्धि दुबे ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें छत्तीसगढ़ मेडिकल PG प्रवेश नियम 2025 के
- नियम 11(a)
- नियम 11(b)
को चुनौती दी गई थी। इन नियमों के तहत उन छात्रों को प्राथमिकता दी जा रही थी, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों से MBBS किया था।
नवंबर में नियम असंवैधानिक, अब बदला फैसला
20 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की।
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत
18 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को यह छूट दी कि वह हाईकोर्ट से स्पष्टीकरण मांगे और यह तय कराए कि संस्थागत कोटे में कितनी सीटों का आरक्षण उचित होगा।
इसी आधार पर राज्य शासन ने हाईकोर्ट में आवेदन प्रस्तुत किया, जिस पर अब यह नया और अहम आदेश आया है।



