
राजनांदगांव। जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन यादव ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बजट आकार और घोषणाओं में भले बड़ा दिखाई दे, लेकिन आम जनता की वास्तविक समस्याओं के समाधान में कमजोर साबित होता है। महंगाई, बेरोजगारी और आय असुरक्षा से जूझ रहे नागरिकों के लिए ठोस दिशा का अभाव साफ दिखाई देता है। लगभग 3 प्रतिशत के आसपास अनुमानित राजकोषीय घाटा और लगातार बढ़ता कर्ज आने वाले वर्षों में राज्य की अर्थव्यवस्था पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ डालेगा। आय-व्यय संतुलन और वित्तीय अनुशासन की स्पष्ट रूपरेखा के बिना यह प्रवृत्ति चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने के दावों के बावजूद इस बजट में उत्पादन लागत घटाने, लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, सिंचाई विस्तार और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने जैसे ठोस एवं दीर्घकालिक कदमों का स्पष्ट खाका नहीं है। कृषि प्रधान राज्य में यदि किसान की आय में वास्तविक वृद्धि नहीं होगी, तो विकास के दावे खोखले सिद्ध होंगे।
मध्यम वर्ग और युवा, जो राज्य की आर्थिक संरचना की आधारशिला हैं, उनके लिए भी बजट में स्पष्ट दिशा का अभाव है। बढ़ती महंगाई और शिक्षा-स्वास्थ्य खर्च से जूझ रहे मध्यम वर्ग के लिए राहत का कोई ठोस रोडमैप नहीं दिखता। वहीं युवाओं के लिए कितनी नई सरकारी नौकरियां सृजित होंगी, किस विभाग में कितने पद भरे जाएंगे और किस निश्चित समयसीमा में भर्ती प्रक्रिया पूरी होगी — इसका उल्लेख तक नहीं है। केवल घोषणाओं से रोजगार नहीं मिलता; पद सृजन और पारदर्शी भर्ती का ठोस कैलेंडर आवश्यक है।
विपिन यादव ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्थाओं के सुधार, पर्याप्त स्टॉफ और उपकरणों के लिए कोई बड़ा प्रावधान स्पष्ट नहीं है। साथ ही राजनांदगांव जिले को भी इस बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। अम्बेडकर चौक से नवागांव 4 किमी सड़क हेतु मात्र 20 लाख रुपये तथा मेडिकल कॉलेज से सुकुलदैहान 3.60 किमी सड़क व पुल-पुलिया निर्माण के लिए केवल 48 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है, जो गुणवत्तापूर्ण कार्य के लिए अपर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि जब पिछले वित्तीय वर्ष में कई विभाग आवंटित राशि का लगभग 20 प्रतिशत खर्च ही नहीं कर पाए, तब नई घोषणाओं की विश्वसनीयता स्वतः प्रश्नों के घेरे में आ जाती है। मेट्रो परियोजना का वर्षों से उल्लेख किया जा रहा है, पर धरातल पर प्रगति स्पष्ट नहीं है।
अंत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता को प्रचार नहीं, परिणाम चाहिए; आंकड़ों की चमक नहीं, आर्थिक स्थिरता चाहिए; और कर्ज के सहारे विकास नहीं, टिकाऊ वित्तीय प्रबंधन चाहिए। अन्यथा यह बजट आने वाले समय में विकास का नहीं, बल्कि वित्तीय दबाव का दस्तावेज़ सिद्ध होगा।




