
नई दिल्ली/तेल अवीव, 26 फरवरी 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा का आज दूसरा दिन है। कयास लगाए जा रहे हैं कि भारत और Israel के बीच एक बड़ी रक्षा डील पर मुहर लग सकती है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि इस दौरान इजरायल के अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम Iron Dome को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय सामने आ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, भारत इस प्रणाली को सीधे खरीदने की बजाय स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम के तहत ‘सुदर्शन चक्र’ जैसी बहुस्तरीय एयर डिफेंस संरचना में शामिल करने की रणनीति पर काम कर सकता है।
क्या है आयरन डोम और क्यों माना जाता है खतरनाक?
आयरन डोम दुनिया के सबसे प्रभावी शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम्स में गिना जाता है। इसे खासतौर पर रॉकेट, मोर्टार और ड्रोन जैसे खतरों को हवा में ही नष्ट करने के लिए विकसित किया गया है।
प्रमुख विशेषताएं:
- हवा में इंटरसेप्शन: दुश्मन के रॉकेट, मोर्टार शेल और ड्रोन को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में मार गिराता है।
- तेज रडार प्रणाली: खतरे की दिशा और संभावित प्रभाव क्षेत्र का कुछ ही सेकंड में आकलन कर लेता है।
- स्मार्ट चयन प्रणाली: केवल उन प्रोजेक्टाइल्स को इंटरसेप्ट करता है जो आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हों।
- शॉर्ट रेंज सुरक्षा: लगभग 4 से 70 किलोमीटर तक की दूरी से दागे गए रॉकेट्स को रोकने में सक्षम।
- मल्टी-टारगेट क्षमता: एक साथ कई खतरों को ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता।
नोट: सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयरन डोम मुख्य रूप से शॉर्ट-रेंज खतरों के लिए डिजाइन किया गया है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह डील?
भारत पहले से ही बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली पर काम कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ड्रोन और रॉकेट हमलों की बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए ऐसी तकनीक सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।




