होलिका दहन 2026: भद्रा और चंद्रग्रहण के चलते केवल 20 मिनट का शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली। इस वर्ष होलिका दहन को लेकर देशभर में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसका कारण है कि फाल्गुन पूर्णिमा के साथ ही भद्रा काल का आरंभ हो रहा है और अगले दिन 3 मार्च को चंद्रग्रहण पड़ रहा है। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन प्रदोष काल में, पूर्णिमा तिथि के दौरान और भद्रा रहित मुहूर्त में ही किया जाना चाहिए।

लेकिन 2026 में 2 मार्च की शाम 5:55 बजे पूर्णिमा शुरू होते ही भद्रा भी लग रही है, जो 3 मार्च की सुबह लगभग 5:28 बजे तक प्रभावी रहेगा। ऐसे में पारंपरिक नियमों के अनुसार प्रदोष काल में होलिका दहन का अवसर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है।

केवल 20 मिनट का सुरक्षित मुहूर्त
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस विशेष स्थिति में भद्रा के अंतिम चरण यानी भद्रा पुच्छ में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है। इस वर्ष केवल 2 मार्च की मध्यरात्रि 12:30 बजे से 12:50 बजे तक का 20 मिनट का शुभ मुहूर्त उपलब्ध है। यह समय भद्रा के अशुभ मुख भाग से पहले का चरण है, इसलिए इसे आपातकालीन शुभ मुहूर्त माना जा रहा है।

धार्मिक ग्रंथों जैसे विष्णु पुराण और भविष्य पुराण में स्पष्ट उल्लेख है कि होलिका पूजन और दहन पूर्णिमा की रात्रि में, प्रदोष काल के दौरान और भद्रा रहित समय में किया जाना चाहिए। लेकिन इस वर्ष भद्रा का प्रभाव प्रदोष से लेकर पूरी रात्रि तक बना रहेगा। विशेष रूप से भद्रा मुख, जिसे अत्यंत अशुभ माना जाता है, 3 मार्च की रात्रि 2:35 बजे से सुबह 4:30 बजे तक रहेगा। इस दौरान कोई भी मांगलिक या धार्मिक अग्नि कर्म नहीं करना चाहिए।

पंचांग विवरण:

  • फाल्गुन पूर्णिमा तिथि: 2 मार्च शाम 5:55 बजे से 3 मार्च शाम 5:07 बजे तक
  • भद्रा काल: 2 मार्च शाम 5:55 बजे से 3 मार्च सुबह 5:28 बजे तक
  • चंद्रग्रहण: 3 मार्च
  • सूटक काल: चंद्रग्रहण के दौरान प्रभावी

अधिकांश स्थानों पर होलिका दहन मध्यरात्रि के बाद केवल 20 मिनट के सीमित मुहूर्त में ही किया जाएगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे केवल इस शास्त्रसम्मत और सुरक्षित समय में ही होलिका दहन करें।

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