आजकल नए स्मार्टफोन पहले की तुलना में ज्यादा महंगे हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे एक बड़ी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल भी है। AI सर्वर को चलाने के लिए तेज और पावरफुल मेमोरी की जरूरत होती है, जिससे चिप्स और RAM जैसी जरूरी कंपोनेंट्स की मांग अचानक बढ़ गई है।
मेमोरी की कीमतों में भारी उछाल, कंपनियों पर बढ़ा दबाव
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में मेमोरी चिप्स की कीमतों में 200 से 300 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। स्मार्टफोन कंपनियां खासकर मिड-रेंज और बजट सेगमेंट में कम मुनाफे पर काम करती हैं। ऐसे में जब जरूरी कंपोनेंट्स महंगे हो जाते हैं, तो कंपनियों के पास कीमत बढ़ाने के अलावा विकल्प कम हो जाते हैं।
AI कंपनियां अपने डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप्स खरीद रही हैं। ये वही चिप्स हैं जो स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट और कार के इंफोटेनमेंट सिस्टम में इस्तेमाल होती हैं। AI के कारण हाई-स्पीड मेमोरी की मांग बढ़ने से बाजार में सप्लाई कम पड़ गई है।
स्मार्टफोन कंपनियों को कैसे झेलना पड़ रहा है दबाव
RAM की कमी का असर लगभग सभी स्मार्टफोन ब्रांड्स पर दिखाई दे रहा है। बड़ी कंपनियां अपने मजबूत सप्लाई नेटवर्क और ज्यादा मुनाफे की वजह से इस दबाव को संभाल लेती हैं, लेकिन छोटे ब्रांड और बजट फोन बनाने वाली कंपनियों के लिए यह चुनौती है।
भारत में 20,000 से 50,000 रुपये के बीच आने वाले स्मार्टफोन सबसे ज्यादा बिकते हैं। यही सेगमेंट वर्तमान में सबसे अधिक प्रभावित है। कंपनियों को या तो कीमत बढ़ानी पड़ती है या फीचर्स में कटौती करनी पड़ती है। कुछ ब्रांड RAM कम करके या पुराने प्रोसेसर का इस्तेमाल करके कीमत नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं।
भविष्य में स्मार्टफोन और लैपटॉप और महंगे हो सकते हैं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेमोरी की कमी जल्दी खत्म होने वाली नहीं है। नई चिप फैक्ट्री बनाने में 2-3 साल का समय लगता है। ऐसे में संभावना है कि RAM की कीमतें ऊंची बनी रहें। इसका सीधा असर स्मार्टफोन और लैपटॉप जैसी डिवाइस की कीमतों पर पड़ेगा। खासकर तब जब AI तकनीक तेजी से आगे बढ़ेगी।




