
नक्सलवाद के खात्मे की ओर भारत: निर्णायक रणनीति और मजबूत नेतृत्व की बड़ी भूमिका
भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा एक लंबा और हिंसक अध्याय अब समाप्ति की कगार पर पहुंचता दिख रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने हालिया बयान में कहा कि देश नक्सलवाद से लगभग मुक्त हो चुका है और माओवादी नेटवर्क की शीर्ष संरचना को काफी हद तक समाप्त कर दिया गया है।
6 दशक पुराना आंदोलन अब ढलान पर
नक्सलवाद की शुरुआत वर्ष 1967 में Naxalbari से हुई थी। Charu Mazumdar, Kanu Sanyal और Jangal Santhal जैसे नेताओं के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन धीरे-धीरे देश के कई राज्यों में फैल गया।
समय के साथ यह तथाकथित “रेड कॉरिडोर” में बदल गया, जो Chhattisgarh, Jharkhand, Bihar, Odisha, Andhra Pradesh और Telangana सहित कई राज्यों में सक्रिय रहा।
रणनीति, समन्वय और सख्ती का असर
गृह मंत्री अमित शाह के कार्यकाल में नक्सलवाद के खिलाफ रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। सुरक्षा बलों को खुली छूट, राज्यों के साथ बेहतर समन्वय, खुफिया तंत्र की मजबूती और विकास योजनाओं को सुरक्षा के साथ जोड़ने से इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया।
राज्यों में सफलता की कहानी
Karnataka में सख्त कार्रवाई और पुनर्वास नीति के चलते 2025 तक नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
वहीं Andhra Pradesh और Telangana में ग्रेहाउंड बल और सटीक खुफिया रणनीति ने माओवादी नेटवर्क को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई।
बड़े फैसलों से बदली सुरक्षा तस्वीर
Narendra Modi सरकार के दौरान लिए गए कई बड़े फैसलों, जैसे Article 370 हटाना, ने देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत किया और आतंकवाद व अलगाववाद पर कड़ा प्रहार किया।
विकास की ओर बढ़ते कदम
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ने से लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। डर और हिंसा की जगह अब उम्मीद और विकास ने ले ली है।
नक्सलवाद के खिलाफ यह सफलता किसी एक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों की रणनीति, सतत प्रयास और मजबूत नेतृत्व का नतीजा है। देश अब उस दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां आंतरिक सुरक्षा मजबूत होने के साथ-साथ विकास की नई संभावनाएं भी खुल रही हैं।
