
ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान: मुख्यमंत्री ने की जनभागीदारी की अपील
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेशवासियों से छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, संस्कृति और ज्ञान-वैभव का जीवंत प्रमाण हैं, जिन्हें सुरक्षित रखकर भावी पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया “ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान” एक दूरदर्शी पहल है। इस अभियान के तहत देशभर में उपलब्ध प्राचीन पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और डिजिटल माध्यम से सुलभ बनाया जा रहा है।
मोबाइल एप के जरिए करें पंजीयन
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि यदि उनके पास कोई प्राचीन पांडुलिपि, हस्तलिखित ग्रंथ या ताड़पत्र सुरक्षित हैं, तो वे ज्ञानभारतम मोबाइल एप पर उनका विवरण दर्ज करें। इससे वे इस राष्ट्रीय अभियान का हिस्सा बन सकेंगे और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में योगदान दे पाएंगे।
जनभागीदारी से मिलेगी नई पहचान
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनभागीदारी के माध्यम से छत्तीसगढ़ की समृद्ध ज्ञान परंपरा को नई पहचान मिलेगी और यह धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से पहुँच सकेगी। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपनी जड़ों को सहेजने और इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
मार्च 2026 से अभियान की शुरुआत
उल्लेखनीय है कि यह राष्ट्रव्यापी अभियान मार्च 2026 से प्रारंभ हुआ है, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य की भी सक्रिय भागीदारी है। अभियान का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध पांडुलिपियों का सर्वेक्षण कर उन्हें सुरक्षित और संरक्षित करना है।
26 जिलों में समितियों का गठन
छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में से 26 जिलों में जिला स्तरीय समितियों का गठन और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है। शेष जिलों में भी यह प्रक्रिया जारी है। जिला स्तर पर बैठकों के माध्यम से पांडुलिपि संग्रहकर्ताओं की पहचान की जा रही है और क्षेत्रवार सर्वेक्षकों की नियुक्ति की जा रही है।
अब तक 4 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सर्वे
ज्ञानभारतम एप के माध्यम से अब तक प्रदेश में 4191 पांडुलिपियों का सर्वे किया जा चुका है। पहले चरण में 148 पांडुलिपियों की जानकारी प्राप्त हुई थी, जिसके बाद अभियान को और विस्तार दिया गया है। वर्तमान में 6 जिलों में सर्वेक्षण कार्य सक्रिय रूप से संचालित किया जा रहा है।

