
वेदांता प्लांट ब्लास्ट की शुरुआती जांच में खुलासा : उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी और सुरक्षा में लापरवाही से गई 20 मजदूरों की जान
सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट की शुरुआती जांच रिपोर्ट में गंभीर लापरवाही सामने आई है। इस हादसे में 20 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 16 घायल हैं, जिनका इलाज जारी है।
एक घंटे में दोगुना किया गया उत्पादन
जांच रिपोर्ट के अनुसार प्लांट में उत्पादन बढ़ाने के लिए जल्दबाजी में बॉयलर का लोड 350 मेगावाट से बढ़ाकर करीब 590 मेगावाट कर दिया गया। इतनी तेज वृद्धि के लिए जरूरी तकनीकी संतुलन का पालन नहीं किया गया, जिससे सिस्टम अस्थिर हो गया।
पहले से मिल रही थी खराबी की चेतावनी
लॉगबुक में सुबह ही पीए (प्राइमरी एयर) फैन में खराबी दर्ज की गई थी। 3-4 घंटे के भीतर फैन में कई बार दिक्कत आई, लेकिन इसके बावजूद काम नहीं रोका गया।
कैसे हुआ विस्फोट?
फैन खराब होने से हवा और ईंधन का संतुलन बिगड़ गया, जिससे फर्नेस में अधजला ईंधन जमा हो गया। अचानक दहन से अत्यधिक दबाव बना और बॉयलर में विस्फोट हो गया।
सेफ्टी सिस्टम भी फेल
जांच में यह भी सामने आया कि बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने के लिए मौजूद सुरक्षा तंत्र समय पर काम नहीं कर सका। बैकअप सिस्टम भी प्रभावी साबित नहीं हुआ।
6 घंटे जांच के बाद रिपोर्ट सौंपी
औद्योगिक सुरक्षा विभाग के बॉयलर इंस्पेक्टर और उनकी टीम ने करीब 6 घंटे तक घटनास्थल का निरीक्षण किया। रिपोर्ट एसपी को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
मुआवजे का ऐलान
- कंपनी द्वारा मृतकों के परिजनों को ₹35 लाख और एक सदस्य को नौकरी
- घायलों को ₹15 लाख की सहायता
- मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख (मृतक) और ₹50 हजार (घायल)
- प्रधानमंत्री राहत कोष से ₹2 लाख (मृतक) और ₹50 हजार (घायल)
कांग्रेस ने बनाई जांच समिति
प्रदेश कांग्रेस ने इस हादसे की जांच के लिए 10 सदस्यीय समिति गठित की है, जो घटनास्थल का दौरा कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
शुरुआती जांच से साफ है कि यह हादसा अचानक नहीं, बल्कि लगातार मिल रहे चेतावनी संकेतों की अनदेखी और सुरक्षा मानकों में लापरवाही का नतीजा था।


