जनदर्शन की शिकायत बनी मजाक? जांच रिपोर्ट ‘भेजी भी गई और मिली भी नहीं’—किसे बचाया जा रहा?

घरघोड़ा (रायगढ़)। पारदर्शिता के दावे करने वाला प्रशासन अब सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत अमलीडीह के कथित भ्रष्टाचार मामले में जांच रिपोर्ट को लेकर ऐसा विरोधाभास सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर संदेह खड़ा कर दिया है।


जनदर्शन से शुरू हुआ मामला

मामला तब शुरू हुआ जब जिला कलेक्टर के जनदर्शन में अमलीडीह के तत्कालीन सचिव शांति बेहरा पर आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत दर्ज कराई गई। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए, टीम बनी और जांच भी पूरी कर ली गई।


रिपोर्ट भेजी गई… या रास्ते में गायब हो गई?

जनपद पंचायत का दावा है कि 6 मार्च 2026 को जांच रिपोर्ट जिला पंचायत को भेज दी गई। इसके लिए कार्यालय में पावती भी मौजूद है।

लेकिन दूसरी तरफ जिला पंचायत का साफ कहना है—“ऐसी कोई रिपोर्ट हमें प्राप्त ही नहीं हुई।”

अब सवाल यह है कि रिपोर्ट आखिर गई तो गई कहाँ? क्या फाइल रास्ते में ही “गायब” हो गई या जानबूझकर रोकी गई?


शिकायतकर्ता भटकता रहा, जवाब गोलमोल

शिकायतकर्ता ने हार नहीं मानी और जन समस्या निवारण शिविर में दोबारा आवेदन दिया। वहां से जवाब मिला कि रिपोर्ट भेज दी गई है और आगे की कार्रवाई जिला स्तर पर होगी।

जब शिकायतकर्ता जिला कार्यालय पहुंचा, तो वहां से सीधा जवाब मिला—“कोई रिपोर्ट आई ही नहीं।”


ग्रामीण बोले—ये जांच नहीं, लुका-छिपी है

ग्रामीण अब इस पूरे मामले को “सरकारी लुका-छिपी” बता रहे हैं, जहां एक विभाग कहता है हमने भेजा, दूसरा कहता है हमें मिला ही नहीं।

इस बीच असली मुद्दा—भ्रष्टाचार की जांच—फाइलों में दबकर रह गया है।


क्या भ्रष्टाचारियों को बचाने की साजिश?

लगातार विरोधाभासी बयानों और कार्रवाई की धीमी गति ने संदेह और गहरा कर दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कहीं न कहीं संबंधित सचिव को बचाने की कोशिश की जा रही है।

अगर यही हाल रहा, तो यह मामला प्रशासनिक “केस स्टडी” बन सकता है—कैसे एक जांच रिपोर्ट को बिना मिले ही ठंडे बस्ते में डाल दिया जाए।


सबसे बड़ा सवाल—न्याय कहां मिले?

अब बड़ा सवाल यही है कि अगर कलेक्टर के जनदर्शन में की गई शिकायत का यह हाल है, तो आम ग्रामीण अपनी समस्या लेकर आखिर जाएं तो जाएं कहाँ?


अब नजर प्रशासन पर

अब देखना होगा कि इस खबर के सामने आने के बाद जिला प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई करता है या फिर यह मामला भी कागजों में दबकर रह जाएगा।

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