
प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री के फैसले से बिगड़ी सप्लाई व्यवस्था, कई दुकानों में स्टॉक की कमी
रायपुर, 9 मई 2026: छत्तीसगढ़ में प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री लागू करने के फैसले के बाद आबकारी विभाग की सप्लाई व्यवस्था प्रभावित हो गई है। नई व्यवस्था को जल्दबाजी में लागू किए जाने के कारण प्रदेशभर की शराब दुकानों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की कमी देखी जा रही है।
स्थिति यह है कि कई दुकानों में लोकप्रिय ब्रांडों का स्टॉक खत्म होने लगा है। वहीं डिस्टलर्स और बोतल सप्लाई से जुड़े कारोबारी सप्लाई व्यवस्था में अड़चन पैदा कर रहे हैं।
दो बार जारी करना पड़ा अलग-अलग आदेश
प्रदेश की लगभग 800 शराब दुकानों में सप्लाई करने वाली डिस्टिलरियों को 1 अप्रैल से पीईटी प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग करने का निर्देश दिया गया था।
अचानक लागू हुए इस फैसले के बाद कई डिस्टिलर्स और बोतल सप्लायरों में हड़कंप मच गया। कई कारोबारी कोर्ट पहुंच गए, जबकि बड़ी मात्रा में प्लास्टिक बोतलों की उपलब्धता भी नहीं हो सकी।
स्थिति बिगड़ने पर विभाग को 31 मई तक दोबारा कांच की बोतलों में बॉटलिंग की अनुमति देनी पड़ी। इस बीच कई डिस्टिलरियों में उत्पादन और बॉटलिंग का काम प्रभावित रहा।
शराब दुकानों में बढ़ी कमी
पुराना स्टॉक खत्म होने के बाद अब दुकानों तक मांग के अनुसार सप्लाई नहीं पहुंच पा रही है। कई जगहों पर देसी और किफायती अंग्रेजी शराब के ब्रांड उपलब्ध नहीं हैं।
आबकारी विभाग के अनुसार प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 70 करोड़ रुपए की शराब बिक्री होती है। सप्लाई प्रभावित होने से सरकार को रोजाना 40 से 50 करोड़ रुपए तक के राजस्व नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
मिलावट रोकने के लिए लिया गया था फैसला
प्लास्टिक बोतलों में शराब सप्लाई का निर्णय राज्य कैबिनेट ने शराब में मिलावट रोकने के उद्देश्य से लिया था। हालांकि कारोबारी स्तर पर तैयारियों की कमी और विरोध के कारण विभाग को बार-बार फैसले में बदलाव करना पड़ रहा है।
31 मई के बाद सख्त कार्रवाई की चेतावनी
आबकारी आयुक्त पदुम एल्मा ने बताया कि लगातार डिस्टलर्स की बैठक ली जा रही है। वर्तमान में प्लास्टिक और कांच दोनों तरह की बोतलों में सप्लाई जारी है।
उन्होंने कहा कि 15 मई से प्लास्टिक बोतलों में सप्लाई बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही 31 मई के बाद सप्लाई में लापरवाही बरतने वाले डिस्टलर्स के लाइसेंस निलंबित किए जा सकते हैं।


