
सोमनाथ स्वाभिमान पर्व पर बाबा धाम कोसमनारा में भव्य आयोजन
गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देशभर में मनाए जा रहे “सोमनाथ स्वाभिमान पर्व” के तहत रायगढ़ के बाबा धाम कोसमनारा में भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया।
जिला प्रशासन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धा, संस्कृति और सनातन परंपरा का विशेष संगम देखने को मिला।
दीप प्रज्वलन और भजन प्रस्तुति से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के छायाचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ राज्य गीत प्रस्तुत किया गया।
कैदीमुड़ा की मां मानकेसरी महिला समूह द्वारा प्रस्तुत शिव भजन और भक्तिमय गीतों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सोमनाथ थीम पर बनाई गई रंगोली
आयोजन स्थल पर सोमनाथ मंदिर थीम पर आकर्षक रंगोली बनाई गई, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रही।
इसके बाद आयोजित “सोमनाथ संवाद” कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपरा और मंदिरों के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा की गई।
धार्मिक धरोहर संरक्षण पर जोर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत की अटूट आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि देशभर में धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं विकास का कार्य लगातार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि रायगढ़ का बाबा धाम आने वाले समय में प्रमुख आस्था और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होगा।
51 फीट बजरंगबली प्रतिमा का भी जिक्र
कार्यक्रम के दौरान रायगढ़ के पहाड़ मंदिर परिसर में प्रस्तावित 51 फीट ऊंची बजरंगबली प्रतिमा निर्माण योजना का भी उल्लेख किया गया।
साथ ही क्षेत्र के प्राचीन मंदिरों और रियासतकालीन धरोहरों के संरक्षण एवं सौंदर्यीकरण की दिशा में कार्य किए जाने की बात कही गई।
प्रधानमंत्री के संबोधन का हुआ सीधा प्रसारण
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने पर दिए गए संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया।
इस दौरान सोमनाथ मंदिर में हुए विशेष जलाभिषेक और भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक टीम के एयर शो का लाइव प्रसारण भी श्रद्धालुओं ने देखा।
महाप्रसाद वितरण के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद वितरण किया गया। साथ ही बाबा धाम को राष्ट्रीय स्तर के आस्था केंद्र के रूप में विकसित करने और धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया गया।


