
गांव पर कर्ज है, लेकिन कितना? हिसाब मांगने पर क्यों खामोश है ग्राम विकास समिति : अनिस सोनी
राजनांदगांव।जिले के छुरिया विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत गैंदाटोला में शराब दुकान भवन निर्माण को लेकर ग्राम विकास समिति की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। गांव में एक ओर यह कहा जा रहा है कि भवन निर्माण का कर्ज अभी भी गांव पर बाकी है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों द्वारा बार-बार हिसाब मांगने के बावजूद अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
अनिस सोनी ने कहा कि गांव के नाम पर बने शराब दुकान भवन का पूरा लेखा-जोखा ग्रामवासियों के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब भवन गांव के नाम पर बना, गांव के नाम पर पैसा खर्च हुआ और गांव के नाम पर कर्ज लेने की बात कही जा रही है, तो हर ग्रामीण को यह जानने का अधिकार है कि आखिर कितना पैसा लगा, किससे लिया गया, कितना कर्ज बाकी है और दुकान से कितनी आय हो रही है।



अनिस सोनी ने कहा कि उन्होंने ग्राम विकास समिति को दो अलग-अलग लिखित आवेदन देकर शराब दुकान भवन निर्माण से जुड़े पूरे आय-व्यय, कर्ज, किराया, राजस्व और वित्तीय दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की है। आवेदन में भवन निर्माण की कुल लागत, किस व्यक्ति या सदस्य ने कितनी राशि दी, यदि ऋण लिया गया तो किससे लिया गया, कितना भुगतान किया गया और कितना बाकी है, इसकी जानकारी मांगी गई है। साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े बिल, वाउचर, लेखा अभिलेखों की सत्यापित प्रतिलिपि, वर्तमान देनदारी और दुकान से प्राप्त किराये का पूरा विवरण भी मांगा गया है।
अनिस सोनी ने कहा कि ग्रामवासियों के बीच पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मुनादी कराकर खुली ग्राम बैठक आयोजित की जानी चाहिए और गांव के सामने पूरा हिसाब रखा जाना चाहिए, लेकिन अब तक न तो कोई बैठक आयोजित की गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब सामने आया है।
अनिस सोनी ने कहा कि अब गांव में एक ही सवाल गूंज रहा है। आखिर “कर्ज” का सच क्या है? सिर्फ यह कह देना कि गांव पर कर्ज है, पर्याप्त नहीं है। गांव के लोग जानना चाहते हैं कि कर्ज कितना है, किससे लिया गया, कब लिया गया, कितना चुकाया गया और अब कितना बाकी है।
इसी बीच अनिस सोनी ने ग्राम विकास समिति की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “हाल ही में समिति द्वारा किसी परिवार को 2000 रुपये की सहयोग राशि दी गई, जिसका प्रचार-प्रसार हर जगह किया जा रहा है कि समिति ने मदद की। लेकिन वही ग्राम विकास समिति पिछले करीब दो साल से शराब दुकान भवन निर्माण का हिसाब देने में हिचकिचा क्यों रही है, यह समझ से परे है। अगर छोटी मदद का प्रचार हो सकता है, तो लाखों रुपये के काम का हिसाब सार्वजनिक करने में दिक्कत क्यों?”
अनिस सोनी ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि गांव में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा, “हिसाब मांगना कोई राजनीति नहीं, गांव के हर व्यक्ति का अधिकार है। गांव किसी की निजी जागीर नहीं है। गांव के नाम पर हुए हर खर्च और फैसले का हिसाब गांव को देना ही पड़ेगा।”
अब देखने वाली बात यह होगी कि ग्राम विकास समिति ग्रामीणों के सवालों का जवाब देती है या फिर ‘कर्ज है,कहकर मामला टालने का सिलसिला जारी रहता है।


