रायगढ़ विधानसभा में जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार में करोड़ों का महाघोटाला
15 करोड़ के कार्यों में भारी भ्रष्टाचार का आरोप, संयुक्त मोर्चा ने कलेक्टर से की बरसात से पहले जांच की मांग
रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सिंचाई विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से तालाबों, जलाशयों और टारों (जलाशयों) के जीर्णोद्धार व मेंटेनेंस कार्यों में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। विभिन्न सामाजिक और जन संगठनों ने इस निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भ्रष्टाचार इस कदर हुआ है कि यह समझ पाना मुश्किल है कि “आटे में नमक मिलाया गया है या नमक में आटा मिलाया गया है।” संगठनों ने रायगढ़ कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को ज्ञापन सौंपकर मानसून की बारिश शुरू होने से पहले ही इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।


रायगढ़ और पुसौर ब्लॉक के कार्यों में ₹15 करोड़ की अफरातफरी का आरोप
‘रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़’, ‘जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा’ और ‘जन चेतना मंच’ के प्रमुख पदाधिकारियों—विनय शुक्ला, वासुदेव शर्मा, राजेश त्रिपाठी, अभिषेक चौहान और शिवम कच्छवाहा सहित अन्य सदस्यों ने बताया कि शासन द्वारा क्षेत्र में जल संरक्षण और पुराने जलाशयों के उन्नयन के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आवंटित की गई थी। इसके तहत बकायदा टेंडर जारी कर ठेकेदारों को निर्धारित मापदंडों के अनुसार काम करना था, लेकिन धरातल पर ग्रामीणों की शिकायतों और स्थल निरीक्षण में केवल कागजी खानापूर्ति और घटिया निर्माण देखने को मिल रहा है।




विभिन्न परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की ग्राउंड रिपोर्ट:
संगठनों ने सिंचाई विभाग (कार्यपालन यंत्री) के अंतर्गत हुए निर्माण कार्यों की पोल खोलते हुए निम्नलिखित ब्योरा प्रस्तुत किया है:
- कोयलंगा डायवर्सन (लागत ₹2 करोड़ 5 लाख): इस परियोजना के तहत बनाई गईं नई नहरें पहली बारिश से पहले ही धंस चुकी हैं और जगह-जगह से फट गई हैं। स्टॉप डैम की रिपेयरिंग में सिर्फ ऊपरी चमक-दमक (थूक पॉलिश) की गई है और पुरानी नहरों की सफाई के नाम पर फर्जी भुगतान निकालने का षड्यंत्र रचा जा रहा है।
- बेलरिया स्टॉप डैम और एनिकट (लागत लगभग ₹5 करोड़ 21 लाख): इस कार्य में व्यापक अनियमितताओं को लेकर ग्रामीणों ने बीते 27 अप्रैल 2026 को ही कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन प्रशासनिक रसूख के चलते इसकी जांच अब तक अटकी हुई है।
- बड़े हरदी तालाब (लागत ₹1 करोड़ 5 लाख): यहां ठेकेदार और अधिकारियों की सांठगांठ से बेहद घटिया सीमेंट का उपयोग किया गया है। निकासी द्वार और पिचिंग के लिए लगाए गए चारखुटिया पत्थर छूते ही झरने की तरह झड़ रहे हैं।
- मंशाटार और सिहा जलाशय (लागत करीब ₹2 करोड़): पुसौर बस्ती के अंतिम छोर पर स्थित इस टार में हुई पिचिंग और ढलाई कुछ ही दिनों में उखड़ने लगी है। विभाग के एस्टीमेट और प्लान के विपरीत ढलाई की मोटाई माप से काफी कम रखी गई है।
- बाघाडोला और बासनपाली जलाशय (लागत ₹2 करोड़ 10 लाख): बाघाडोला में सीमेंट के घोल की मोटी पुताई कर घटिया निर्माण को छिपाने का प्रयास किया गया है। वहीं, बासनपाली में बिना लोहे की छड़ (सरिया) लगाए और बिना जमीन की लेबलिंग किए लकड़ी के पट्टों के सहारे ऊबड़-खाबड़ ढलाई कर दी गई।


बरसात के पानी में सुबूत बहने से पहले हो ठोस कार्रवाई
कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में अमन तलरेजा, सुरेंद्र पटेल, सुबल गुप्ता, संतोष राणा, वीरेंद्र गुप्ता, बंशीधर प्रधान, नरोत्तम चौहान, सत्यानंद चौहान, योगेंद्र निषाद, तुलाराम भोई, शशिधर पंडा, गोवर्धन मांझी और अनिल चीकू सहित बड़ी संख्या में नागरिकों के हस्ताक्षर हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने युवा कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी से पुरजोर आग्रह किया है कि यदि इन सभी निर्माण कार्यों की तकनीकी जांच मानसून की पहली बारिश से पहले नहीं कराई गई, तो पानी भरने के बाद भ्रष्टाचार के सारे सुबूत स्वतः ही बह जाएंगे और ठेकेदार व विभागीय अधिकारी क्लीन चिट पा लेंगे। जागरूक नागरिकों ने मांग की है कि मौके पर तत्काल तकनीकी टीम भेजकर जांच कराई जाए ताकि इस 15 करोड़ रुपये के सिंडिकेट घोटाले के दोषियों को बेनकाब कर उन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।



