बिजली का दर बढ़ी, काँग्रेस ने खोला मोर्चा कहा-‘ये जनता के साथ धोखा’

छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं को अगले महीने से ज्यादा बिजली बिल चुकाना होगा। राज्य विद्युत नियामक आयोग ने बिजली दरों में 6.23 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है। नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। इस फैसले के बाद प्रदेश की राजनीति भी गर्मा गई है और कांग्रेस ने राज्य सरकार पर जनता के साथ धोखा करने का आरोप लगाया है। काँग्रेस तीन चरणों में आंदोलन करेगी। बुधवार 17 जून को प्रदेश भर में सरकार के निर्णय के विरोध में पुतला दहन करेंगे। 18 को सभी जिलों प्रेसवार्ता कर बिजली बिल के विरोध में जनता को बताएंगे। वहीं जुलाई पहले सप्ताह मेें गांव-गांव जाकर स्मार्ट मीटर के विरोध में फार्म भरवाएंगे।

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कांग्रेस ने किया बढ़ोतरी का पुरजोर विरोध
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा, भाजपा सरकार के कार्यकाल में यह पांचवीं बार है जब बिजली की दरें बढ़ाई गई हैं। उन्होंने कहा, इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। कांग्रेस का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद पहले ही लोगों के बिजली बिल बढ़ गए हैं और अब नई दरों से उपभोक्ताओं की परेशानी और बढ़ेगी। कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के समय 400 यूनिट तक बिजली पर जो राहत दी जाती थी, उसे वर्तमान सरकार ने बंद कर दिया है। पार्टी का कहना है कि लगातार बिजली दरों में बढ़ोतरी कर सरकार जनता के हितों की अनदेखी कर रही है। प्रेस कांफ्रेंस में पूर्व पीसीसी अध्यक्ष धनेंद्र साहू, पूर्व मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया ने भी अपने वचिार रखें और पीसीसी के निर्णय का स्वागत किया।


जानें कितना बढ़ा टैरिफ
नई दरों के अनुसार घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली शुल्क में 30 पैसे से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि की गई है। वहीं व्यावसायिक और गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 पैसे से 40 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली महंगी हुई है। कृषि क्षेत्र के लिए भी बिजली दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी की गई है। इससे किसानों की लागत पर भी असर पड़ सकता है। बिजली कंपनी ने पहले आयोग के सामने लगभग 24 प्रतिशत दर वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। कंपनी का कहना था कि बिजली उत्पादन, खरीद और वितरण की लागत बढऩे के कारण दरों में बढ़ोतरी जरूरी है। हालांकि आयोग ने सभी पक्षों की राय और आपत्तियों पर विचार करने के बाद केवल 6.23 प्रतिशत की औसत वृद्धि को मंजूरी दी।

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