शिक्षा और समाजसेवा का पर्याय: रामचंद्र शर्माज्ञान, अनुशासन और जनसेवा की मिसाल

25 जुलाई जन्मदिवस विशेष
रायगढ़। कुछ व्यक्तित्व अपने पद से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से समाज में पहचान बनाते हैं। शिक्षा, अनुशासन और समाजसेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने वाले रामचंद्र शर्मा ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा देकर हजारों लोगों के जीवन को नई दिशा दी है। शिक्षक, पुलिस अधिकारी और शिक्षाविद के रूप में उनकी यात्रा समाज के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण मानी जाती है।
रामचंद्र शर्मा ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत वर्ष 1997 में युवाओं के लिए नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग से की। उस समय आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बिना किसी शुल्क के मार्गदर्शन प्रदान किया गया। उनके प्रयासों का परिणाम यह रहा कि 200 से अधिक युवाओं का चयन पुलिस, न्यायिक सेवा, बैंक, नायब तहसीलदार तथा अन्य विभिन्न शासकीय सेवाओं में हुआ। आज भी उनके अनेक विद्यार्थी प्रदेश और देश के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।
वर्ष 2000 में रामचंद्र शर्मा का चयन प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सेवा क्षेत्र में हुआ और उन्होंने पुलिस विभाग में अपनी जिम्मेदारियाँ संभालीं। लगभग 16 वर्षों तक उन्होंने छत्तीसगढ़ के सुदूर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों सहित अनेक जिलों में पुलिस निरीक्षक के रूप में कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ अपनी सेवाएँ दीं। कठिन परिस्थितियों में भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जनविश्वास को मजबूत करने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
वर्ष 2016 में उन्होंने स्वेच्छा से पुलिस सेवा को अलविदा कहा और एक बार फिर अपने प्रथम प्रेम—शिक्षा—की ओर लौट आए। वर्तमान में वे छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में शामिल संस्कार पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर के रूप में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कार्य कर रहे हैं। उनका मानना है कि राष्ट्र निर्माण का सबसे मजबूत आधार शिक्षा है और एक अच्छा विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कारों का भी मंदिर होता है।
विद्यालय संचालन के साथ-साथ उन्होंने पुन: युवाओं के लिए नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग प्रारंभ की, जो आज भी निरंतर संचालित हो रही है। उनका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि संसाधनों के अभाव में किसी भी युवा का सपना अधूरा न रह जाए। एक शिक्षक जिसने युवाओं को सपने दिए, एक पुलिस अधिकारी जिसने कर्तव्य निभाया और एक शिक्षाविद जो आज भी नई पीढ़ी का भविष्य संवार रहा है—रामचंद्र शर्मा की यही यात्रा उन्हें शिक्षा और समाजसेवा का पर्याय बनाती है।
25 जुलाई को उनके जन्मदिवस के अवसर पर उनके विद्यार्थी, सहयोगी, अभिभावक, समाजसेवी और शुभचिंतक उन्हें शुभकामनाएँ दे रहे हैं। मेरा का मानना है कि रामचंद्र शर्मा का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची सफलता केवल स्वयं आगे बढऩे में नहीं, बल्कि दूसरों को आगे बढ़ाने में है।
पत्रकार भीम सेन तिवारी‌ (आप की आवाज)

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